Thursday, February 9, 2023
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राष्ट्रपति की रेस में NDA से थी 3 महिलाये : द्रौपदी मुर्मू के नाम पर मुहर; जानिए आदिवासी महिला नेता को कैंडिडेट बना कर BJP को क्या मिलेगा

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अगले महीने की 25 तारीख को देश को नया राष्ट्रपति मिलेगा। नामांकन प्रक्रिया चल रही है। 29 जून को पर्चा भरने की आखिरी तारीख है। इस बीच NDA ने झारखंड की राज्यपाल रह चुकीं द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है।

इसे भास्कर ने सबसे पहले बताया था कि BJP में तीन महिलाओं के नाम पर विचार किया जा रहा है, जिसमें द्रौपदी मुर्मू, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके और UP की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के नाम शामिल हैं।

द्रौपदी मुर्मू ओडिशा से आनेवाली आदिवासी नेता हैं। झारखंड की नौंवी राज्यपाल रह चुकीं द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं। वह पहली ओडिया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया। इससे पहले BJP-BJD गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक वह मंत्री भी रह चुकी हैं।

नजर लोकसभा की 60 से ज्यादा सीटों पर
गौरतलब है कि लोकसभा की 543 सीटों में से 47 सीट ST श्रेणी के लिए आरक्षित हैं। 60 से अधिक सीटों पर आदिवासी समुदाय का प्रभाव है। मध्य प्रदेश, गुजरात, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में आदिवासी वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। ऐसे में आदिवासी के नाम पर चर्चा चल रही थी। इससे BJP को चुनाव में भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अगले डेढ़ साल के भीतर विधानसभा चुनाव होंगे, जिसका सियासी तौर पर लाभ भाजपा को मिलने की संभावना जताई जा रही है।

विपक्ष से पूर्व भाजपा नेता यशवंत सिन्हा का नाम
इससे पहले राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार को लेकर विपक्ष की तरफ से BJP के पूर्व दिग्गज और TMC से इस्तीफा दे चुके यशवंत सिन्हा का नाम आगे बढ़ाया गया। वहीं BJP में महामहिम की रेस में महिला, मुस्लिम, दलित या दक्षिण भारत की किसी हस्ती के नाम पर विचार किया जा रहा था, ताकि 2022-23 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों को साधने में आसानी हो सके।

राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जिन समुदायों पर नजर है, दैनिक भास्कर ने एक-एक करके उनकी पड़ताल की। आप भी पढ़िए…

आदिवासी : देश में अब तक आदिवासी समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बन पाया है। महिला, दलित, मुस्लिम और दक्षिण भारत से आने वाले लोग राष्ट्रपति बन चुके हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय इससे वंचित रहा है। ऐसे में यह मांग उठती रही है कि दलित समाज से भी किसी व्यक्ति को देश के सर्वोच्च पद पर बैठाया जाए।

महिला : महिलाएं भाजपा के लिए कोर वोट बैंक बन चुकी हैं। इस वोट बैंक को साधने की भाजपा की कोशिश जारी है। बताया जा रहा है कि महिलाओं के नाम पर सबसे तेजी से विचार किया जा रहा था। इसमें UP की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल भी शामिल थीं। आनंदी बेन PM नरेंद्र मोदी की करीबी मानी जाती हैं।

आनंदी बेन के अलावा पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, छत्तीसगढ़ की राज्यपाल अनुसुइया उइके भी इस रेस में शामिल बताई जा रही थीं। पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनने से भाजपा एक तीर से दो निशाना लगाएगी। पहला आदिवासी समाज को साधने में मदद मिलेगी। साथ ही महिला वोट बैंक में भी मजबूत पकड़ बनी रहेगी।

अनुसुइया उइके मूल रूप से छिंदवाड़ा की हैं और 1985 से मध्य प्रदेश से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने दमुआ से विधायक का चुनाव जीता था। वह BJP की राज्यसभा सांसद भी रह चुकी हैं। राजनीति में आने से पहले वह छिंदवाड़ा के शासकीय महाविद्यालय में तीन साल तक इकोनॉमिक्स की लेक्चरर भी रही हैं।

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