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किसान मामले में बोलने वाले ब्रिटेन को भारत का जवाब,आक्सफोर्ड में नस्लीय भेदभाव पर हम भी चुप नहीं बैठेंगे

ब्रिटेन की आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल की रश्मि सामंत के साथ हुए नस्लीय भेदभाव पर केंद्र में संसद में जवाब दिया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में कहा कि भारत सरकार सभी डिवेलपमेंट्स पर नजर बनाए हुए है। उन्‍होंने कहा कि जब जरूरत होगी तो भारत इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगा।

जयशंकर ने कहा, ‘महात्‍मा गांधी की जमीन से होने के नाते, हम कभी नस्‍लवाद से आंखें नहीं चुरा सकते। खासतौर से तब जब यह किसी ऐसे देश में हो जहां हमारो लोग इतनी ज्‍यादा संख्‍या में हों. हमारे यूके साथ मजबूत रिश्‍ते हैं। जरूरत पड़ने पर हम पूरी स्‍पष्‍टता से ऐसे मुद्दे उठाएंगे।’

गौरतलब है कि दिल्‍ली की सीमाओं पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इसे लेकर ब्रिटेन की संसद में हाल ही में चर्चा हुई। कंजर्वेटिव पार्टी की थेरेसा विलियर्स ने साफ कहा कि कृषि भारत का आंतरिक मामला है और उसे लेकर किसी विदेशी संसद में चर्चा नहीं की जा सकती। हालांकि, लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी के नेतृत्व में 36 ब्रिटिश सांसदों ने किसान आंदोलन के समर्थन में चिट्ठी लिखकर भारत पर दबाव बनाने की बात कही थी। ऐसे में अब भारत ने भी आक्सफोर्ड मामले में चुप न रहने की बात कही है।

बता दें कि ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनकर रश्मि ने इतिहास रचा था लेकिन उसके बाद उन्‍हें कुछ पुरानी टिप्‍पणियों के चलते इस्‍तीफा देना पड़ा। सामंत ने दावा किया कि इस पूरे प्रकरण में ‘नस्लीय भेदभाव’ शामिल था।

दरअसल, रश्मि ने जब चुनाव जीता था तो 2017 की उनकी कुछ पुरानी सोशल मीडिया पोस्‍ट्स को ‘नस्‍लभेदी’, ‘साम्‍य विरोधी’ और ‘ट्रांसफोबिक’ बताया गया। इसमें 2017 में जर्मनी में बर्लिन होलोकास्ट मेमोरियल की यात्रा के दौरान एक पोस्ट में नरसंहार से जुड़ी टिप्पणी और मलेशिया की यात्रा के दौरान तस्वीर को चिंग चांग शीर्षक देने से जुड़ा विवाद है, जिससे चीन के छात्र भड़क गए थे।

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