क्या है डिजिटल मीडिया कानून | Digital Media Ethics 2021 | Digital Media Channel Registration : Gbn24

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केंद्र सरकार ने नेटफ्लिक्स-अमेजन प्राइम और MX प्लेयर जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया की निगरानी करने वाले नियमों को कड़ा कर दिया है. स्ट्रीमिंग कंपनियों को अब लगातार आ रहे आपत्तिजनक कंटेंट को शिकायत के बाद हटाना होगा. वहीं, फेसबुक-व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसी कंपनियों को कंटेंट की निगरानी के लिए शिकायत निपटान अधिकारी की नियुक्त करनी होगी और सरकार को जांच में सहयोग देना होगा.

बड़ी बात यह है कि OTT प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया कंपनियों की मनमानी रोकने के लिए सरकार ने कोई नया कानून नहीं बनाया, बल्कि ‘इंफर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट 2000’ के तहत अब नियम बनाए हैं. इस एक्ट में तीन तरह के प्लेटफॉर्म्स की बात कही गई है. ये प्लेटफॉर्म्स हैं

सोशल मीडिया

डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स

OTT प्लेटफॉर्म्स

नग्नता, अश्लील हरकत और तस्वीरों से छेड़छाड़ जैसी सामग्री को शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर हटाना होगा. साथ ही महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत पर 24 घंटे के भीतर पोस्ट को संबंधित प्लेटफॉर्म से हटाना होगा. इसमें महिला की तरफ से की गई शिकायत जरूरी नहीं होगी.

शिकायतों से निपटने के लिए एक शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा और इस अधिकारी को 24 घंटे के अंदर शिकायत स्वीकार करनी होगी और 15 दिनों के अंदर उसका निवारण करना होगा. इस नए नियम से अब फेसबुक-व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का गलत इस्तेमाल करना बंद हो जाएगा. मतलब सीधा सा है कि अब फेक न्यूज, अफवाहें और आपत्तिजनक कंटेंट यूजर्स तक नहीं पहुंचेगा.

गाइडलाइन्स जारी करते हुए सरकार ने कहा है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल हिंसा और अफवाहें फैलाने के तौर पर भी किया जाता है. लेकिन अब फेसबुक-व्हाट्सएप, सिगन्ल, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को बताना होगा कि सबसे पहले कंटेंट किसने शेयर किया यानी वायरल पोस्ट का ओरिजनेटर कौन है. एंड टू एंड इंक्रिप्शन की वजह से अबतक व्हाट्सएप जैसी कंपनियां ओरिजनेटर की जानकारी साझा नहीं करती थीं, लेकिन अब सरकार के मांगने के बाद ओरिजनेटर की जानकारी देना अनिवार्य होगा.

दरअसल सोशल मीडिया पर महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़ीं तमाम शिकायतें आती हैं. कहीं गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप के बाद बॉयफ्रेंड ने आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल कर दीं तो कहीं कोई महिला को ब्लैकमेल कर रहा होता है. ऐसे में अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इन सभी बातों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करनी ही होगी.

डिजिटल युग में आज सभी न्यूज़ कंपनियों के सोशल मीडिया पर भी अकाउंट्स हैं. जहां वह अपनी खबरें यू-ट्यूब फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर के जरिए यूजर्स तक पहुंचाते हैं. इन सभी को डिजिटल न्यूज मीडिया कहा जाता है. अब नए नियमों में डिजिटल न्यूज मीडिया के पब्लिशर्स को प्रेस काउंसिल ऑफ के नॉर्म्स ऑफ जर्नलिस्टिक कंडक्ट और केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रेगुलेशन एक्ट के तहत प्रोग्राम कोड का पालन करना होगा. मतलब अब प्रिंट-टीवी और डिजिटल मीडिया के लिए एक ही तरह के नियम होंगे.

नेटफ्लिक्स-अमेजन प्राइम, एल्ट बालाजी और MX प्लेयर जैसे तमाम प्लेटफॉर्म्स पर फिल्में, वेबसीरीज और अन्य कंटेट सीधे ऑनलाइन रिलीज होते हैं. इस प्लेटफॉर्म को ओवर-द-टॉप यानि OTT प्लेटफॉर्म कहा जाता है. सराकर ने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की मनमानी रोकने के लिए भी अब नियम सख्त किए हैं.

देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म का कंटेंट हमेशा से ही विवादों में रहा है. नेटफ्लिक्स-अमेजन प्राइम जैसी बड़ी कंपनियों पर कभी अश्लीलता तो कभी हिंसात्मक दृश्य दिखाने और कभी धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगता रहा है. नए नियमों में सरकार ने कोड ऑफ एथिक्स की बात कही है. यानि अब ओटीटी प्लेटफॉर्म मनमाने ढंग से कुछ भी नहीं दिखा पाएंगे और इनपर भी सेंसरशिप लागू होगी. यानि अब दर्शक को कुछ भी आपत्तिजनक कंटेंट नहीं परोसा जाएगा.

बता दें कि भारत डिजिटल और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है. भारत में 53 करोड़ व्हाट्सऐप यूजर्स, 44.8 करोड़ यू-ट्यूब यूजर्स, 41 करोड़ फेसबुक यूजर्स, 21 करोड़ इंस्टाग्राम यूजर्स और 1.75 करोड़ ट्विटर यूजर्स हैं.

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