Friday, June 14, 2024

पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों को क्यों नहीं माना जाता मुसलमान,आखिर कौन है अहमदिया मुसलमान ?

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न्यूज़ डेस्क : (GBN24)

भारत और पाकिस्तान के बटवारे का सबसे बड़ा कारण है धर्म। धार्मिक आधार पर ही दोनों का बटवारा हुआ। पाकिस्तान देश को इस लिए बनाया गया कि यहां पर मुसलमान रहेंगे। लेकिन बटवारा होने के बावजूद भी पाकिस्तान में हमला ख़राब व्यवहार रुकने के नाम नहीं ले रहा।

दरअसल पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर अहमदिया मुसलमान रहते हैं, जिनके साथ वहां के दूसरे मुसलमान खराब सुलूक करते है। पाकिस्तान में अहमदिया को हमेसा हमलो का शिकार होना पड़ता है और ये आज से नहीं हो रहा ये हमला गलत व्यवहार कई वर्षो से इनके साथ होता चला आ रहा।

अहमदियों का कहना है कि लगातार उनके प्रार्थना स्थलों और कब्रिस्तानों पर हमला किया जाता है। ये सारे हमले सुनियोजित ढंग से किए जाते हैं। और साथ ही इन्हें अक्सर ईश निंदा के मामलों में भी फंसाया जाता है। जिसके कारण अब यह समुदाय पाकिस्तान छोड़ कर किसी अन्य देश में बसना शुरू कर दिए है।

कौन है अहमदिया समुदाय ?

भारत में ज़्यादातर अहमदिया समुदाय पंजाब के क़ादियान क़स्बे में रहते हैं। यहां अहमदिया समुदाय के संस्थापक मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद की जन्म हुई थी। अहमदिया समुदाय के मुताबिक मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद ने बीसवीं सदी की शुरुआत में इस्लाम के पुनरुत्थान का एक आंदोलन चलाया था और उनके अनुयायी खुद को अहमदिया मुस्लिम कहते हैं। लेकिन पाकिस्तान के मुसलमान अहमदिया समुदाय को मुस्लिम नहीं मानते है।

पाकिस्तान के सविंधान में अहमदिया को अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम धार्मिक समुदाय का दर्जा दिया गया है। साथ ही चरमपंथी ही नहीं लिबरल मुस्लिम भी अहमदिया मुसलमानों को इस्‍लाम का विरोधी मानते हैं। आपको बता दें पाकिस्तान में करीब 5 लाख अहमदिया समुदाय के लोग रहते है। अक्सर आपने पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों के खिलाफ ईशनिंदा के मुकदमे दर्ज कर सजा देने के मामले सामने आते रहते है।

बता दें अहमदिया समुदाय अपने प्रार्थना स्थलों पर मीनार नहीं बना सकते है, क्योंकि अहमदिया मुसलमानों को जब गैर-मुस्लिम अल्‍पसंख्‍यक घोषित किया गया उसके बाद उनको मस्जिद में जाने पर पाबंदी लगा दी गई। इसीलिए पाकिस्‍तान में अहमदिया समुदाय की मस्जिदों और लोगों पर अक्सर हमले होते रहते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें पाकिस्‍तान में खुद को अहमदिया बताने वाले लोगों को और मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले लोगो पर सख्‍त सजा का प्रावधान है। जिसमे पाकिस्‍तान दंड संहिता की धारा-298सी के तहत तीन साल जेल की सजा और कुछ मामलों में आरोपी पर जुर्माना भी लगाने की कानून है

 

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