Saturday, October 8, 2022
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पाकिस्तान में क्यों गिरी भारत की ‘सुपरसोनिक मिसाइल’? केंद्र सरकार ने दिए उच्च स्तरीय जांच के आदेश…

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भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मियां चन्नू शहर में 9 मार्च को गिरी एक मिसाइल की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है। एक बयान में, केंद्र ने कहा, “9 मार्च 2022 को, नियमित रखरखाव के दौरान, एक तकनीकी खराबी के कारण मिसाइल की आकस्मिक फायरिंग हुई। भारत सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और एक हाई लेवल कोर्ट ऑफ इनक्वायरी का आदेश दिया है।”

भारत सरकार ने कहा, “यह पता चला है कि मिसाइल ने पाकिस्तान के एक क्षेत्र में लैंड किया। जहां एक तरफ यह घटना अत्यंत खेदजनक है, राहत की बात यह भी है कि दुर्घटना के कारण किसी की जान नहीं गई है।” इससे पहले दिन में, पाकिस्तानी सशस्त्र बलों ने दावा किया था कि भारत का एक प्रक्षेप्य कथित तौर पर उसके क्षेत्र में उतरा था।

पाकिस्तानी थल सेना ने गुरुवार को दावा किया कि उसने कथित तौर पर भारत से उसके हवाई क्षेत्र में आ रही एक मिसाइल का पता लगाया है, जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गिर गया।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल बाबर इफ्तिखार ने मीडिया से कहा, ‘9 मार्च को शाम छह बजकर 43 मिनट पर एक तेज गति से उड़ने वाली वस्तु ने भारतीय क्षेत्र से उड़ान भरी और वह अपना मार्ग भटक कर पाकिस्तान के क्षेत्र में प्रवेश कर गई तथा गिर गई। उसके गिरने से असैन्य इलाकों को कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन इसमें किसी की जान नहीं गई।”

पाकिस्तान ने दावा किया कि एक निहत्थे भारतीय सुपरसोनिक मिसाइल ने सिरसा से उड़ान भरी और बुधवार शाम को पाकिस्तानी क्षेत्र में 124 किलोमीटर की दूरी पर उतरी। यह कहा गया है कि मिसाइल, 40,000 फीट की ऊंचाई पर मंडरा रही थी और भारतीय और पाकिस्तानी दोनों हवाई क्षेत्र में यात्री उड़ानों और जमीन पर नागरिकों और संपत्ति को भी खतरे में डाल रही थी।

मिसाइलों को लेकर क्या है भारत-पाकिस्तान का समझौता? 

बैलिस्टिक मिसाइलों के फ्लाइट टेस्ट की पूर्व-सूचना पर भारत और पाकिस्तान के बीच 2005 में समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार, प्रत्येक देश को फ्लाइट टेस्ट से कम से कम तीन दिन पहले सूचित करना होता है, चाहे वह सतह से सतह पर, जमीन पर या समुद्र से प्रक्षेपित मिसाइले हैं। इसमें आगे कहा गया है कि प्रक्षेपण स्थल अंतरराष्ट्रीय सीमा या नियंत्रण रेखा से 40 किमी के भीतर नहीं गिरना चाहिए और नियोजित प्रभाव क्षेत्र 75 किमी के भीतर नहीं आना चाहिए।
 

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