Sunday, December 4, 2022
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रविनंदन मिश्र महाविद्यालय का मान्यता खत्म होना कोशी के लिए दुर्भाग्य की बात : भावेश झा

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सहरसा रवि नंदन मिश्र विधि महाविद्यालय की मान्यता उच्च न्यायालय पटना के द्वारा समाप्त करने को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के मण्डल विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय संयोजक सह सीनेट सदस्य भावेश झा ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि

कोसी प्रमंडल का एकमात्र अंगीभूत विधि महाविद्यालय रविनंदन मिश्र महाविद्यालय की मान्यता खत्म होना कोशी के लिए दुर्भाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि ललित नारायण मिश्र के द्वारा इस महाविद्यालय की स्थापना कोसी क्षेत्र के गरीब गुरबों एवं पिछड़े लोगों के लिए रोजगार सृजन करने में बड़ी अहम भूमिका रही। आज हजारों परिवार वकालत के माध्यम से कोसी क्षेत्र में अपना जीविकोपार्जन चला रहे हैं जिसमें इस महाविद्यालय की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि ललित नारायण मिश्र जैसे महान विभूतियों के द्वारा अपने पिता के नाम पर महाविद्यालय की स्थापना कर इस क्षेत्र के लोगों को उच्च शिक्षा में सक्षम बनाने के उद्देश्य से किया गया था ।

उन्होंने कहा कि ललित नारायण मिश्र ने इस महाविद्यालय की स्थापना कर कोशी क्षेत्र को वकालत के माध्यम से रोजगार देकर इस क्षेत्र के उन्नति एवं गरीबी मिटाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की अकर्मण्यता एवं लापरवाही की वजह से आज उनके द्वारा स्थापित किया गया महाविद्यालय अपने अस्तित्व बचाने के लिए अंतिम लड़ाई लड़ रहा है । आज माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा सत्र 2020 21 में मान्यता समाप्त कर दिया गया है और अगर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मानक पैमाने पर या महाविद्यालय नहीं उतरती है तो हमेशा के लिए इसकी मान्यता समाप्त होने की संभावना प्रबल बन जाएगी ।

उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया से एफीलिएशन लेने में हुए देरी के लिए महाविद्यालय प्रशासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन पूर्ण रूप से जिम्मेदार है ।एफीलिएशन के लिए शुल्क जमा करने को लेकर महाविद्यालय प्रशासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन दोनों ने उदासीनता बरती है।  जब महाविद्यालय प्रशासन की देर से नींद खुली तो महाविद्यालय प्रशासन विश्वविद्यालय प्रशासन से बार-बार एफिलियेशन के शुल्क जमा करने को लेकर अनुमति लेने के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर लगाता रहा लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन उस समय चिर निंद्रा में सोई रही जिस कारण सही समय पर राशि जमा नहीं हो सकना  भी मान्यता रद्द होने में एक प्रमुख कारण है ।

जिसे उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट कहा है कि उक्त महाविद्यालय ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया में एफीलिएशन के लिए विलंब से अपना आवेदन समर्पित किया। सीनेट सदस्य ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन में बैठे हुए चंद लोग जानबूझकर निजी महाविद्यालयों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से कई अंगीभूत महाविद्यालयों की स्थिति जर्जर बनाने की कोशिश करते रहते हैं ताकि अंगीभूत महाविद्यालयों की इसी तरह मान्यता खत्म होते जाए और निजी महाविद्यालयों की चांदी कट की जाए।

श्री भावेश झा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि इस महाविद्यालय में राज्य सरकार के द्वारा चार चार शिक्षकेतर कर्मचारियों के सृजित पद होने के बावजूद भी एक भी स्थाई कर्मचारी की नियुक्ति नहीं करना एक साजिश का बहुत बड़ा हिस्सा है।शिक्षा माफियाओं के इशारे पर इतने वर्षों में एक बार भी स्थाई एल0 एल0 एम0 डिग्री धारी प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए विश्वविद्यालय के द्वारा राज्य सरकार से  गंभीरता से प्रयास नहीं किया गया। जानबूझकर केवल पत्राचार करके छोड़ दिया गया जो कई वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ा रहा ।जिस कारण राज्य सरकार के द्वारा अनदेखी का शिकार हुआ ।

इतना ही नहीं इस महाविद्यालय को जब सामंजन प्राप्त हुआ तब से लेकर अब तक प्राचार्य का पद भी अंशकालिक ही जानबूझकर बने रहने दिया गया । जिस कारण स्थाई प्राचार्य नहीं होने के कारण महाविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों में जर्जरता आ गई। इतना ही नहीं विश्वविद्यालय प्रशासन जो चंद शिक्षा माफियाओं के गोद में बैठी हुई है उनके द्वारा इस महाविद्यालय की मान्यता समाप्त करवाने के उद्देश्य से इस महाविद्यालय में स्थापना काल से चल रहे पांच कमरे का भवन का कोई विस्तारित नहीं किया गया। वर्ष 2018-19 में तत्कालीन कुलपति अवध किशोर राय के द्वारा अंशकालीन प्राध्यापकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन तो निकाला गया लेकिन शिक्षा माफियाओं के इशारे पर इसे ठंडे बस्ते में जानबूझकर डाल दिया गया । जिस कारण अब शिक्षकों की संख्या नगण्य हो चुकी है केवल दो से तीन मात्र बचे हैं। ऐसी स्थिति उत्पन्न  कराने के पीछे सिर्फ और सिर्फ एक मात्र अंगीभूत महाविद्यालय की मान्यता छीन कर निजी महाविद्यालय को लाभ पहुंचाना था। 


श्री भावेश झा ने आगे कहा कि अब इस क्षेत्र के लोगों में भी इस मामले को लेकर काफी रोष व्याप्त है क्योंकि ललित नारायण मिश्र इस क्षेत्र के स्थानीय रहने के कारण उस एकमात्र महाविद्यालय से इस क्षेत्र के लोगों का विशेष जुड़ा एवं लगाव रहा है।  जिस कारण क्षेत्र के लोगों में महाविद्यालय की जर्जर स्थिति को देखकर विश्वविद्यालय प्रशासन के अकर्मण्यता एवं लापरवाही के खिलाफ जबरदस्त रोष व्याप्त हो रहा है और आम जनमानस कभी भी आंदोलन के रास्ते पर जा सकती है। उन्होंने कहा कि श्री ललित नारायण मिश्र के द्वारा स्थापित यह महाविद्यालय हमारे क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता था लेकिन जानबूझकर हमारे क्षेत्र के गौरव एवं धरोहर को शिक्षा माफियाओं के साथ मिलकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने गर्त में पहुंचा दिया। 


उन्होंने शिक्षा संकाय को लेकर के भी निशाना साधते हुए कहा कि विगत लगातार 2 वर्षों से विश्वविद्यालय के किसी न किसी महाविद्यालय के B.Ed  संकाय की मान्यता भी छीनती रही है। क्योंकि जानबूझकर महाविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करना कर्मचारियों की कमी एवं आधारभूत संरचनाओं की कमी को बरकरार रखना होता है ताकि इनकी मान्यता हमेशा छीनती रहे और छात्र निजी महाविद्यालयों के तरफ मजबूरी में जाते रहे और वहां पर इन शिक्षा माफियाओं के द्वारा जमकर शोषण किया जा सके।

उन्होंने कहा कि विगत 1 वर्षों से भी अधिक समय से कुलपति को बारंबार जिन महाविद्यालय के शिक्षा संकाय में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की कमी है उसकी नियुक्ति के लिए लगातार विद्यार्थी परिषद ध्यान आकृष्ट कई आंदोलन एवं ज्ञापन के माध्यम से कराते आ रही है लेकिन यह लोग अपने हितों को साधने और शिक्षा माफियाओं के गोद में बैठ कर छात्र-छात्राओं का शोषण कर रहे हैं ।वही उन्होंने कहा की तीन तीन कुलपतियों के द्वारा B.Ed में रोस्टर पालन एवं नियुक्तियों में बरती गई लापरवाही को लेकर जांच कमेटी बनाया गया लेकिन जांच कमेटी की अध्यक्षता करने वाले सभी पदाधिकारी और सभी सदस्य आज तक मौन बैठे हैं। सभी जांच समिति से संबंधित लोग जांच  के नाम पर महाविद्यालयों में अपना हित साधने पर लगे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में छात्र छात्राओं का शिक्षा माफिया जमकर शोषण करते हैं उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद अब इस मामले को लेकर चुप नहीं बैठेगी और आर पार की लड़ाई लड़ेगी ।कोसी प्रमंडल का एकमात्र अंगीभूत विधि महाविद्यालय की मान्यता लापरवाही एवं अकर्मण्यता की वजह से चली गई इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन एवं महाविद्यालय प्रशासन पूर्ण रूप से जिम्मेदार है। इसके लिए विद्यार्थी परिषद हर लड़ाई लड़ने को पूर्णता तैयार है।।

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