Sunday, May 22, 2022
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कांग्रेस के भीतर गुलाम नबी आजाद की अगुआई में ‘जी-23’ समूह के जम्मू में आयोजित बैठक को लेकर कांग्रेस में बेचैनी बढ़ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने ‘जी-23’ के नेताओं को खुला पत्र लिखकर पूछा है कि क्या वह पाला बदलने का विचार कर रहे हैं। इसके साथ ही खुर्शीद ने असंतुष्ट नेताओं से प्रश्न किया कि जिस सीढ़ी पर चढ़कर वे जिंदगी के सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंचे हैं, क्या उसे गिराना सही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के गुमनाम कार्यकर्ता भी लोकतंत्र में भरोसा रखते हैं।

ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक, उन्होंने कहा, ‘हमें लगा कि जी-23 ने अपनी बात रखी और उन्हें सूचित किया गया कि पार्टी के भीतर चुनाव उचित समय पर होगा। इसके लिए वे कांग्रेस अध्यक्ष और बाद में सीडब्ल्यूसी के साथ बातचीत में सहमत हुए थे। मगर क्या जम्मू में सार्वजनिक प्रदर्शन के साथ वे एक बार फिर पाला बदल रहे हैं? जैसा कि हमें बताया जा रहा है कि ठीक इसी तरह की सभा हरियाणा में भी बहुत जल्द होगी।

उन्होंने लिखा कि जी-23 नेताओं का नाम पार्टी में उपलब्धियों के शानदार इतिहास के साथ जुड़ा है, मगर हजारों गुमनाम कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना योगदान दिया है लेकिन उन्हें बदले में बहुत कम या कुछ भी नहीं मिला हो, वे भी लोकतंत्र की परवाह करते हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री खुर्शीद ने उक्त नेताओं से कहा है कि उन्हें वर्तमान में सही स्थान तलाशने की बजाय इस पर चिंतन करना चाहिए कि इतिहास उन्हें कैसे याद रखेगा। जम्मू में गुलाम नबी आजाद के नेतृत्व में समूह 23 के नेताओं द्वारा सार्वजनिक तौर पर आक्रोश का प्रदर्शन करने के बाद खुर्शीद का यह बयान आया है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह से इंडिया गेट पर राष्ट्रीय शहीदों के नाम उकेरे जाते हैं, कांग्रेस कार्यालय में भी ऐसे रिकॉर्ड हैं, जहां असंख्य नामों को हमारे इतिहास के हिस्से के रूप में उकेरा गया है। कांग्रेस के दफ्तर में हमारा नाम दर्ज हो, हम सबके लिए बस इतना ही काफी है। बता दें कि खुर्शीद का बयान ऐसे वक्त में आया है, जब आनंद शर्मा और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने कहा था कि कांग्रेस कमजोर हो रही है।

उन्होंने कहा कि असंतुष्ट नेताओं को इस पर चिंता करने की बजाय कि उन्हें क्या मिला, कांग्रेस के अन्य नेताओं के साथ मिलकर देश के सामान्य कार्यकर्ता को दिखाना चाहिए कि वर्तमान में अंधेरे से निकलकर रौशनी में कैसे पहुंचना है। खुर्शीद ने कहा कि बलिदान के साथ सफलता मिलेगी ही यह जरूरी नहीं होता।

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