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बिहार कोर्ट ने AES बच्चों की मौत मामले में केंद्रीय और राज्य स्वास्थ्य मंत्रियों के खिलाफ जांच का आदेश दिया

Bihar court orders investigation against Health Ministers Harsh Vardhan and Mangal Pandey over AES deaths in Muzaffarpur

लापरवाही के आरोप में जांच का आदेश

बिहार की एक अदालत ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और बिहार स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के खिलाफ लापरवाही के आरोप में जांच का आदेश दिया है। आरोप है कि इस लापरवाही के कारण मुज़फ़्फरपुर जिले में लगभग 150 बच्चों की मौत एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) के चलते हुई है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) सूर्यकांत तिवारी ने अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ADJM) को इस मामले की जांच करने का आदेश दिया। यह आदेश समाजिक कार्यकर्ता तमन्ना हाशमी द्वारा दायर याचिका के आधार पर लिया गया।

मंत्रियों पर लगाए गए आरोप

तमन्ना हाशमी ने आरोप लगाया कि दोनों मंत्रियों ने बिहार में AES के प्रति जनता को जागरूक करने में कोई कदम नहीं उठाया, जबकि यह रोग राज्य में वर्षों से बच्चों की जान ले रहा है। याचिका भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और 308 के तहत दायर की गई है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि मंत्रियों ने सिंड्रोम के फैलाव को रोकने में अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं।

अगली सुनवाई की तारीख

अदालत ने अगली सुनवाई 28 जून, 2026 को तय की है, जिसमें जांच की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

AES का संक्षिप्त परिचय

एक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) एक गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करती है और समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा हो सकती है। मुज़फ़्फरपुर जिले में पिछले कई वर्षों से AES के मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें उच्च मृत्यु दर दर्ज की गई है।

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