इंडिगो में बड़े पैमाने पर रद्द उड़ानें
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो गंभीर संसाधन संकट और परिचालन अव्यवस्था से जूझ रही है। लगातार सातवें दिन उड़ानें बड़े पैमाने पर रद्द होने से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। प्रमुख हवाई अड्डों पर भारी भीड़ और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। केवल सोमवार को ही 450 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिनमें दिल्ली एयरपोर्ट की 134 उड़ानें शामिल थीं। बेंगलुरु, अहमदाबाद और विशाखापट्टनम में भी कई उड़ानें प्रभावित हुईं।
अदालतों में भी गूंजा इंडिगो संकट
इंडिगो की अव्यवस्था का मामला अब अदालतों तक पहुंच गया है। दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है जिसमें फंसे यात्रियों की सहायता और रिफंड से जुड़े दिशा-निर्देशों की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई बुधवार के लिए तय की है और कहा कि केंद्र सरकार पहले ही कुछ निर्देश जारी कर चुकी है। वहीं सुप्रीम कोर्ट में भी स्थिति की गंभीरता उठाई गई, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह “एयरलाइन नहीं चला सकती” और सरकार मामले पर संज्ञान ले चुकी है।
उड़ानों की रद्दीकरण से बढ़ी अव्यवस्था
संकट रविवार को उस समय और गहरा गया जब इंडिगो ने एक ही दिन में 650 उड़ानें रद्द कर दीं। इससे पहले दो दिनों में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द की जा चुकी थीं। भारतीय घरेलू हवाई यात्रा के इतिहास में इतनी बड़ी परिचालनिक अव्यवस्था कम ही देखने को मिली है। यह हालात तब पैदा हुए जब केंद्र सरकार ने एयरलाइन कर्मचारियों पर वर्किंग आवर लिमिटेशन लागू किया, जिसके बाद क्रू की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
यात्रियों में बढ़ी नाराज़गी, सरकार सक्रिय
लगातार उड़ानें रद्द होने से यात्रियों में नाराज़गी तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर लोग एयरलाइन की व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। इस बीच, केंद्र सरकार और DGCA स्थिति को सामान्य करने की कोशिशों में सक्रिय हैं। यात्रियों को हुए नुकसान की भरपाई, रिफंड और वैकल्पिक उड़ानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन संकट के पूरी तरह नियंत्रित होने में अभी समय लग सकता है।















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