Tuesday, October 4, 2022
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रसातल में रुपया: डॉलर के मुकाबले 80.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, जानें क्या होगा आप पर असर

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भारतीय रुपया आज शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 80.05 पर आ गया है। सोमवार को रुपया 79.97 पर बंद हुआ था। अमेरिकी डॉलर इस साल अब तक भारतीय रुपये के मुकाबले 7.5% ऊपर है। डॉलर इंडेक्स सोमवार को एक सप्ताह के निचले स्तर पर फिसलकर 107.338 पर पहुंच गया। पिछले हफ्ते डॉलर इंडेक्स बढ़कर 109.2 हो गया था, जो सितंबर 2022 के बाद सबसे ज्यादा है। 

रुपये में गिरावट की ये हैं बड़ी वजहें

मिलवुड  केन इंटरनेशनल के संस्थापक और सीईओ निश भट्ट डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं, “कई कारणों से डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हो रहा है। अमेरिका में आर्थिक मंदी, फेड की बड़ी हुई दरें, रूस-यूक्रेन के बीच भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बारे में चिंताओं ने भारतीय मुद्रा को अब तक के सबसे निचले स्तर पर धकेल दिया है। यूएस फेड की दरों में आक्रामक रूप से बढ़ोतरी ने डॉलर को मजबूत किया और बाद में, एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजारों से भी धन निकाला। एफपीआई ने 2022 (YTD) में भारतीय बाजार से रिकॉर्ड 2.25 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं।

भट्ट आगे बताते हैं कि  रुपये का गिरना अपेक्षित तर्ज पर है, हालांकि 2014 के बाद से इसमें लगभग 25% की गिरावट आई है, जबकि अन्य एशियाई मुद्राओं की तुलना में गिरावट मध्यम रही है। डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राएं कमजोर होती हैं, जैसा कि 2020 और 2013 में देखा गया था। वास्तव में, GBP, यूरो और येन जैसी कुछ प्रमुख मुद्राओं में रुपये से अधिक गिरावट हुई है।

दरअसल डॉलर कभी इतना महंगा नहीं था , इसे बाज़ार की भाषा में कहा जा रहा हैं कि रुपया रिकॉर्ड लो पर यानी अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। मुद्रा का दाम हर रोजाना घटता बढ़ता रहता है। डॉलर की जरूरत बढ़ती चली गई। इसकी तुलना में बाक़ी दुनिया में हमारे सामान या सर्विस की मांग नहीं बढ़ी, इसी कारण डॉलर महंगा होता चला गया।

आप पर ऐसे पड़ेगा असर

डॉलर महंगाई होने से तेल और दाल के लिए अधिक खर्च करने पड़ेंगे, जिसका असर इनकी कीमतों पर होगा। इनके महंगा होने से आपके किचन का बजट बिगड़ सकता है। इसके अलावा विदेश में पढ़ाई, यात्रा, दलहन, खाद्य तेल, कच्चा तेल, कंप्यूटर, लैपटॉप, सोना, दवा, रसायन, उर्वरक और भारी मशीन, जिनका आयात किया जाता है, वह महंगे हो सकते हैं।

दवाएं, मोबाइल, टीवी के दाम बढ़ेंगे

भारत जरूरी इलेक्ट्रिक सामान और मशीनरी के साथ मोबाइल-लैपटॉप समेत कई दवाओं का भारी मात्रा में आयात करता है। अधिकतर मोबाइल और गैजेट का आयात चीन और अन्य पूर्वी एशिया के शहरों से होता और अधिकतर कारोबार डॉलर में होता है। अगर रुपये में इसी तरह गिरावट जारी रही तो देश में आयात महंगा हो जाएगा। विदेशों से आयात होने के कारण इनकी कीमतों में इजाफा तय है। मतलब मोबाइल और अन्य गैजेट्स पर महंगाई बढ़ेगी और आपको ज्यादा खर्च करना होगा।

रसोई के बजट पर असर

भारत 80 फीसद कच्चा तेल आयात करता है। कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ेगी। इससे माल ढुलाई महंगी हो जाती है। ऐसे में रुपये के कमजोर होने से रसोई से लेकर घर में उपयोग होने वाले रोजमर्रा के सामान के दाम बढ़ सकते हैं जिससे आपकी जेब हल्की होगी। साथ ही पेट्रोल-डीजल महंगा होने से किराया भी बढ़ सकता है जिससे कहीं आना-जाना महंगा हो सकता है।


खाद्य तेल महंगा होने की आशंका

भारत खाद्य तेल का 60 फीसदी आयात करता है। इसकी खरीद डॉलर में होती है। ऐसे में यदि रुपया कमजोर होता है तो खाद्य तेलों के दाम घरेलू बाजार में बढ़ सकते हैं। हाल के दिनों में सरकार ने खाद्य तेलों को सस्ता करने के लिए इसपर आयात शुल्क खत्म कर दिया है।

रोजगार के अवसर घटेंगे

भारतीय कंपनियां विदेश से सस्ती दरों पर भारी मात्रा में कर्ज जुटाती हैं। रुपया कमजोर होता है तो भारतीय कंपनियों के लिए विदेश से कर्ज जुटाना महंगा हो जाता है। इससे उनकी लागत बढ़ जाती है जिससे वह कारोबार के विस्तार की योजनाओं को टाल देती हैं। इससे देश में रोजगार के अवसर घट जाते हैं।

विदेश यात्रा, शिक्षा महंगी हो जाएगी

विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों को रहने खाने से लेकर फीस तक सब डॉलर में चुकानी होती है। ऐसे में रुपये के कमजोर होने से उन छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। उनके परिहन की लागत भी बढ़ जाएगी। इसके अलावा विदेश यात्रा भी महंगा हो जाएगा।

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