Monday, December 5, 2022
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मुसलमानों की सलाह पर जॉइन की शिवसेना; 25 साल से कोई चुनाव नहीं हारे एकनाथ

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महाराष्ट्र में मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल में जिस शख्स का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, वे हैं एकनाथ शिंदे। ठाणे की कोपरी-पछपाखाड़ी विधानसभा सीट से विधायक और मौजूदा सरकार में नगर विकास और सार्वजनिक निर्माण मंत्री शिंदे की ठाणे में मजबूत पकड़ है। एकनाथ, एक नाम नहीं बल्कि अपने आप में एक पार्टी हैं। ठाणे की जनता उन्हें शिवसेना के संस्थापकों में से एक आनंद चिंतामणि दिघे के प्रतिबिंब के रूप में देखती है। यही वजह है कि लोग आंख बंद करके शिंदे के फैसले के साथ खड़े हैं।

दैनिक भास्कर ने भी ‘शिंदे के साम्राज्य’ में पहुंच कर यह पड़ताल करने का प्रयास किया कि कैसे एक ऑटो ड्राइवर संघर्ष करके सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच गया। आप भी पढ़िए हमारी ये खास रिपोर्ट …

पूरे ठाणे से उद्धव की फोटो गायब, हर तरफ दिखते हैं शिंदे

एकनाथ शिंदे के समर्थन में ठाणे में जगह-जगह शिवसेना कार्यकर्ता एकजुट नजर आ रहे हैं। इसे शिंदे का शक्ति प्रदर्शन भी कहा जा रहा है।

एकनाथ शिंदे के पीछे न सिर्फ ठाणे की जनता खड़ी है, बल्कि दो तिहाई से ज्यादा, यानी शिवसेना के 40 विधायक भी हैं। शिंदे ने उद्धव के खिलाफ बगावती सुर क्या बुलंद किए, पूरे ठाणे जिले में उनके समर्थन में बैनर और पोस्टर लग गए। इन पोस्टर्स में बाला साहब तो थे, लेकिन मौजूदा शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की तस्वीर गायब हो गई।

राजनीति में एंट्री कर पानी की समस्या दूर की
शिंदे का बचपन ठाणे के किसन नगर वागले स्टेट 16 नंबर में बीता। आज यहां उनका एक फ्लैट भी है। इसमें वे अपने माता-पिता और तीन भाई-बहनों के साथ रहते थे।

उनके बचपन के दोस्त जगदीश पोखरियाल बताते हैं कि एकनाथ शुरू से ही लोगों के लिए खड़े होने वालों में से थे। यहां पीने के पानी की भारी समस्या थी। महिलाओं को दूर से पानी लाना पड़ता था। इस परेशानी को देखते हुए शिंदे एक दिन रमेश के पास आए और कहा कि इस परेशानी का हल कैसे होगा। इस पर रमेश ने उन्हें पॉलिटिक्स में उतरने की सलाह दी। शुरू में शिंदे ने मना किया, लेकिन बाद में वे RSS शाखा से जुड़ गए।

मुस्लिमों ने कराई शिवसेना में एंट्री

ये हफीजुर्रहमान चौधरी की दुकान है, जहां एकनाथ शिंदे ने ठाणे नगर निगम का चुनाव लड़ने का फैसला किया था।

ठाणे में शिंदे का कद कुछ ऐसा है कि शिवसेना का मूल कैडर यानी हिंदू ही नहीं, मुस्लिम भी उनके साथ खड़ा है। यही वजह है कि शिंदे के नाम पर दोनों समुदायों के लोगों ने उनके बेटे श्रीकांत शिंदे को चुन कर लोकसभा में भेजा। एकनाथ के PA रह चुके इम्तियाज शेख उर्फ ‘बच्चा’ ने बताया कि शिवसेना से जुड़ने से पहले शिंदे RSS शाखा प्रमुख थे और ऑटो रिक्शा चलाते थे।

आनंद दिघे एक दिन उनके इलाके में आए और उन्होंने लोगों से पूछा कि वे अपने पार्षद (नगर सेवक) के रूप में किसे देखना चाहते हैं। इस पर इम्तियाज समेत सैकड़ों मुसलमानों ने एक सुर में एकनाथ शिंदे का नाम आगे कर दिया। इसके बाद ही शिंदे की सक्रिय रूप से शिवसेना में एंट्री हुई।

यहीं फेब्रिकेशन की दुकान चलाने वाले हफीजुर्रहमान चौधरी ने बताया कि उनकी दुकान पर बैठ कर ही एकनाथ शिंदे ने नगर सेवक चुनाव लड़ने का फैसला किया था।

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