Tuesday, June 18, 2024

समंदर में दिखेंगी नौसेना की ताकत, Indian Navy को मिलेंगे स्वदेशी जहाज, जो बन जाएंगे सभी युद्धपोतों के गार्जियन

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न्यूज़ डेस्क : (GBN24)

अब दुनिया देखेगी समंदर में भारतीय नौसेना की बढ़ती ताकत को, भारत में ही अब से Indian Navy के लिए ऐसे जहाज बनाए जाएंगे, जिससे समंदर में नौ सेना का दमखम देखने को मिलेगा. जी हा हम बात कर रहे हैं भारतीय नौसेना की पहली फ्लीट सपोर्ट शिप की, जिसके तहत Indian Navy के लिए अब ऐसे जहाज बनाए जाएंगे, जो सभी युद्धपोतों का गार्जियन होगा, युद्ध के दौरान सभी युद्धपोतों का गार्जियन होगा.

यह जंग के दौरान और सामान्य दिनों में जंगी जहाजों पर ईंधन, पानी, गोला-बारूद और अन्य सामान पहुंचाने का काम करेगा, बता दें जिसमें कुल पांच सपोर्ट शिप्स होंगे,

स्वदेश में बने जहाज़ Indian Navy के लिए कितने महत्वपूर्ण

भारत में Indian Navy के लिए अब ऐसे जहाज बनाए जाएंगे, जो सभी युद्धपोतों का गार्जियन होगा. यह जंग के दौरान और सामान्य दिनों में जंगी जहाजों पर ईंधन, पानी, गोला-बारूद और अन्य सामान पहुंचाएगा. ये भारतीय नौसेना की पहली फ्लीट सपोर्ट शिप होंगी. जिसमें कुल पांच सपोर्ट शिप्स होंगे.

भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए पहले फ्लीट सपोर्ट शिप्स की स्टील कटिंग का काम शुरू हो गया है. विशाखापट्टनम के हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड में यह काम किया जा रहा है. इन जहाजों को बानाने के लिए पिछले साल समझौते हुए थे. जानकारी के लिए बता दें, साल 2027 के मध्य तक इन जहाजों की डिलिवरी होनी है.

अगले चार सालो में ये ज़हाज़ बन जाने की संभावना हैं, हलाकि अधिकतम 8 साल में इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से खत्म करने का निर्देश है. कुल पांच ज़हाज़ों का निर्माण होना हैं, ये पांचों जहाज पूरी तरह से स्वदेश में बनेंगे. इनका डिस्प्लेसमेंट 40 से 45 हजार टन होगा. इन्हें ज़हाज़ों को बनाने के लिए कुल 19 हजार करोड़ रुपए की लागत आएगी.

बता चले इनके बनने से भारतीय नौसेना को दो तरह के फायदे होंगे. पहला युद्ध के दौरान नौसेना के जंगी जहाजों को ईंधन, पानी, रसद, गोला-बारूद की सप्लाई होती रहेगी.

अक्सर जंग के दौरान जब रसद ख़त्म हो जाते है तब सेना को भारी मुसीबतों और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, रसद आने तक का इंतज़ार करना पड़ता हैं, कभी कभी यह कारण , हार की भी वजह बन सकती हैं, लेकिन अब ये स्पोर्ट सिस्टर नौसेना को ताकत और बल देगा,

अब बात कर लेते हैं इन ज़हाज़ों की क्षमता क्षौर बनावट की ….

इन जहाजों की लंबाई 754.7 फीट होगी. ये अधिकतम 37 km/hr प्रति घंटे रफ़्तार से चल सकेंगे. वही अगर इन्हें 28 से 30 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाया जाए तो ये 22 हजार किलोमीटर की रेंज कवर कर सकते हैं. इनके ऊपर एक HAL Dhruv हेलिकॉप्टर तैनात हो सकता है.

ध्रुव हैलीकॉप्टर हिंदुस्तान ऐरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा विकसित और निर्मित भारत का एक बहूद्देशीय हैलीकॉप्टर है। इस जहाज पर जंगी जहाजों में फ्यूल देने के लिए रीफ्यूलिंग फैसिलिटी लगी होगी. साथ में एक हेलिकॉप्टर हैंगर भी होगा. इससे बंदरगाह पर बिना लौटे ही युद्धपोत अपने मिशन को पूरा कर सकेंगे.

इसके अलावा आपदा के दौरान राहत कार्यों के लिए इन जहाजों का इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर दूसरे देशों में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित लाने के लिए कर सकते हैं. बेड़े में शामिल होने पर इनसे भारतीय नौसेना की ‘ब्लू वाटर’ क्षमताएं बढ़ेंगी.

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