Friday, May 27, 2022
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पाकिस्तान : अल्पसंख्यकों पर हमले जारी, अब बंदूकधारियों ने की पादरी की गोली मारकर हत्या

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पाकिस्तान के पेशावर शहर में चर्च से घर लौटते समय एक ईसाई पादरी की हत्या कर दी गई है। पुलिस ने कहा कि वह हमलावरों की तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।पाकिस्तान में मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात बंदूकधारियों ने एक ईसाई पादरी की हत्या कर दी और एक अन्य को घायल कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। यह घटना पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर शहर पेशावर में हुई जब पीड़ित चर्च से कार से घर लौट रहे थे।

पुलिस के मुताबिक शहर के रिंग रोड पर हुए हमले में 75 वर्षीय विलियम सिराज की मौके पर मौत हो गई, जबकि उनका एक साथी घायल हो गया और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कार में सवार तीसरे पादरी को कोई चोट नहीं आई। पुलिस का कहना है कि हमलावरों का पता लगाने के लिए सीसीटीवी फुटेज की गहनता से जांच की जा रही है।

धार्मिक अल्पसंख्यक खतरे में पीड़ित पादरियों के बारे में कहा जा रहा है कि वे प्रोटेस्टेंट चर्चों के एक संघ, चर्च ऑफ पाकिस्तान से जुड़े हैं। इसमें मेथोडिस्ट और एंग्लिकन विचारधारा के ईसाई शामिल हैं। चर्च ऑफ पाकिस्तान के सबसे वरिष्ठ बिशप आजाद मार्शल ने हमले की निंदा की और एक ट्वीट में कहा, “हम पाकिस्तान की सरकार से ईसाइयों के लिए न्याय और सुरक्षा की मांग करते हैं” किसी भी समूह ने इस गोलीबारी की जिम्मेदारी नहीं ली है।

हालांकि पिछले कुछ दिनों में अफगान सीमा से उत्तर पश्चिमी पाकिस्तान में सुरक्षा बलों पर आतंकवादी हमले बढ़ते जा रहे हैं। इनमें से कई हमलों का दावा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने किया है। यह समूह अफगान तालिबान से संबद्ध होने का दावा करता है। इसी समूह ने दिसंबर में सरकार के साथ एक महीने से चल रहे संघर्ष विराम समझौते को समाप्त कर दिया था। हाल के हफ्तों में पाकिस्तान में आतंकी हिंसा बढ़ी है। पेशावर में ही 2013 में एक चर्च के बाहर दो बड़े आत्मघाती बम विस्फोटों में दर्जनों लोग मारे गए थे।

यह पाकिस्तान में ईसाइयों पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक था। ताजा हमले में मारे गए विलियम सिराज के लिए एक मेमोरियल सर्विस सोमवार को ऑल सेंट चर्च में आयोजित की जाएगी। पाकिस्तान में ईसाई और कुछ अन्य गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को अक्सर धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी अन्य मुस्लिम समूह जैसे अहमदी और शिया समुदाय के सदस्य ऐसे हमलों के जरिए निशाना बनाए जाते हैं। 

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