Friday, July 1, 2022
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यूएन: ईरान ने जनवरी से मार्च के बीच 100 से ज्यादा लोगों को फांसी दी

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ईरान ने साल के पहले तीन महीने में 100 से अधिक लोगों को फांसी की सजा दी है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को जेनेवा में ईरान में फांसी की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए एक रिपोर्ट पेश की है.

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सामने बोलते हुए यूएन की उप मानवाधिकार प्रमुख नादा अल-नाशिफ ने ईरान पर गुटेरेश की ताजा रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि देश में फांसी की संख्या बढ़ रही है.

उन्होंने कहा, “जबकि 2020 में 260 लोगों को फांसी पर चढ़ाया गया, 2021 में कम से कम 310 लोगों को फांसी दी गई. सजा पाने वालों में कम से कम 14 महिलाएं शामिल थीं. यह प्रवृत्ति इस साल भी जारी है.

105 लोगों को फांसी

नाशिफ ने कहा कि इसी साल 1 जनवरी से 20 मार्च के बीच कम से कम 105 लोगों को फांसी दी गई, जिनमें से ज्यादातर अल्पसंख्यक समूहों के थे. उन्होंने कहा कि गुटेरेश ने अपनी रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की थी कि नशीली दवाओं समेत छोटे अपराधों के लिए फांसी की संख्या बढ़ रही है.

उन्होंने कहा, “मृत्युदंड को ‘सबसे गंभीर अपराधों’ के आरोपों और निष्पक्ष परीक्षण मानकों के असंगत तरीकों के आधार पर लगाया जाना जारी है.” उन्होंने कहा कि कई ऐसे मामले हैं जो फांसी की सजा के दायरे में नहीं आते और आरोपियों को न्याय पाने का पूरा मौका नहीं दिया जाता है.

नाशिफ ने आगे कहा कि मादक पदार्थों से संबंधित आरोपों में मार्च में 52 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी. उन्होंने नाबालिग दोषियों की निरंतर फांसी की भी आलोचना करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है

नाबालिग भी फांसी की सजा पा रहे

उन्होंने ने कहा कि अगस्त 2021 से मार्च 2022 के बीच कम से कम दो किशोर लड़कों को उनके कथित अपराधों के लिए फांसी दी गई, जबकि 85 से अधिक किशोर फांसी का इंतजार कर रहे हैं.

नाशिफ ने कहा, “फरवरी 2022 में एक सकारात्मक विकास में सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी की मौत की सजा को उलट दिया, जिसे 18 साल पहले मौत की सजा सुनाई गई थी.”

नाशिफ ने कहा, “अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए अत्यधिक बल का प्रयोग किया. अप्रैल और मई 2022 में शिक्षकों, वकीलों, कलाकार और ऐक्टिविस्टों समेत राष्ट्रीय सुरक्षा के आरोपों में कम से कम 55 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया.”

उन्होंने कहा कि नवंबर 2019 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए किसी को दोषी ठहराने के लिए आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

जेनेवा में ईरान के उप स्थायी प्रतिनिधि मेहदी अली एबादी ने रिपोर्ट की आलोचना करते हुए कहा कि यह “झूठ और बेईमानी” पर आधारित है और पश्चिमी ताकतें संयुक्त राष्ट्र की आड़ में इस तरह की रिपोर्टों के माध्यम से ईरान को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं.

उन्होंने कहा, “मानवाधिकारों के उच्चतम सिद्धांतों और मानकों को एक मामूली राजनीतिक हथकंडे तक सीमित करना बहुत शर्मनाक और खेदजनक है.”

इसी महीने नॉर्वे के एनजीओ ईरान ह्यूमन राइट्स (आईएचआर) ने दावा किया था कि ईरान में एक साथ 12 कैदियों को फांसी लगाई गई. आईएचआर के मुताबिक मरने वालों में 11 पुरुष और एक महिला थी और उन्हें ड्रग्स से जुड़े अपराध या हत्या के आरोपों में सजा हुई थी.

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