Saturday, July 13, 2024

Randeep Hooda की फिल्म ‘Swatantrya Veer Savarkar’ हुई सिनेमाघरों में रिलीज! जाने कैसा रहा दर्शकों का Response

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हिमानी बिष्ट न्यूज़ डेस्क : (GBN24)

‘Swatantrya Veer Savarkar’ मशहूर एक्टर Randeep Hooda की फिल्म है, जो अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. इस फिल्म में एक्टिंग के साथ-साथ Randeep Hooda ने इस फिल्म का निर्देशन भी किया है. आपको बतादें की इस फिल्म में Randeep Hooda के साथ आपको Ankita Lokhande भी एक अहम भूमिका निभाती दिख रही हैं. लेकिन इस फिल्म को यदि आप देखना चाहते हैं तो आपको पहले इस फिल्म के रिव्यु को जान लेना बेहद जरुरी है, उसके बाद ही आप इस फिल्म को देखने के लिए टिकट बुक करवाएं:

कैसी है ‘Swatantrya Veer Savarkar’ फिल्म –

विनायक दामोदर सावरकर की जब – जब बात हुई है या होती है तब – तब उनकी कविताओं का भी जिक्र होता है, क्यूंकि विनायक ने अंग्रेजों के देश में जाने के बाद और पूरी तरह से टूट जाने के बाद ब्रायटन के समंदर के किनारे बैठकर कुछ कवितायें लिखी थी, जो आज भी लोगों के दिलों में बस्ती है, उनमे से कुछ खास कवितायें हैं “मेरे लिए तो अब दश दिशाओं में अंधेरा छा गया है, जैसे एक तोता पिंजरे में फंसता है कुछ ऐसे ही मैं यहां फंसा हूं, हे सागर अब तू मुझे मेरी मातृभूमि के पास ले चल, मेरे प्राण तरस गए हैं, मेरी मातृभूमि से दूरियां अब मैं कैसे सहूं”

आपको बतादें की मराठी भाषा में लिखी वीर सावरकर की कुछ मशहूर कविताओं की पंक्तियों का हिंदी भाषा में अनुवाद भी हुआ है. ये सारी ऐसी कविताएं हैं जो आपको बहुत ज्यादा भावुक कर सकती है, और रोने के लिए भी विवश कर सकती हैं. उनके जीवन की उलझनों के बारे में सुनकर और जानकर हमारी ऑंखें भर जाती है. लेकिन 3 घंटे की Randeep Hooda की इस फिल्म को देखने के बाद न तो लोगों की आँखों में आसूं आये है, न कोई रोंगटे खड़े हुए हैं और न ही उनकी आँखें भरी हैं.

बात करें इस फिल्म की तो इस फिल्म के डिस्क्लेमर में ये लिखा गया है की ‘हम सबको हमेशा से ये कहा गया है कि देश को स्वतंत्रता अहिंसा से मिली है.’ और इन शब्दों के साथ ही ऐसा देखा जा रहा है की इस फिल्म में वीर विनायक दामोदर सावरकर कितने सही थे इसे दिखाने की बजाय दुसरे लोग कितने गलत थे इसे ज्यादा दिखाया गया है.

जैसा की हम सब ये जानते है की कोई भी इंसान किसी भी चीज में पूरी तरह से परफेक्ट नहीं होता है, हर किसी में कुछ न कुछ खामियां जरूर होती है, तो अगर बाकी लोगों की इस फिल्म में गलतियां और खामियां को ढूढ़ने और दिखाने के साथ – साथ अगर कुछ खामियां वो सावरकर की भी उनके गुणों के साथ बताते तो शयद आम जनता उनको खुदसे जोड़ पाती, साथ ही उन्हें करीब से महसूस भी कर पाती। लेकिन इस फिल्म में उनको हीरो दिखाने के चक्कर में और ‘सुपरहीरो’ का दर्जा देने के चक्कर में Randeep Hooda ने इस मौके को खो दिया, जिस वजह से लोगों को ये फिल्म कुछ खास पसंद नहीं आयी.

 

 

 

 

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