Monday, December 5, 2022
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युवाओं को सुसाइड के लिए उकसा रहा है सोशल मीडिया!, पैरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

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Things Parents Can Do to Help Prevent Suicide: साइकोलॉजिस्ट के अनुसार सोशल मीडिया, युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ाने में योगदान कर रहा है। पिछले कुछ सालों में 18 से कम उम्र के बच्चों द्वारा

Social Media and Suicide: आज के समय में एक-दूसरे से जुड़े रहने के लिए लोग सोशल मीडिया पर बहुत अधिक निर्भर हो गए हैं। बात अगर युवाओं की करें तो सोशल मीडिया की लत उनके लिए कहीं न कहीं एक खतरा बनकर उभर रही है। साइकोलॉजिस्ट के अनुसार सोशल मीडिया, युवाओं में आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ाने में योगदान कर रहा है।

पिछले कुछ सालों में 18 से कम उम्र के बच्चों द्वारा सोशल मीडिया का इस्तेमाल काफी बढ़ा है। ऐसा भी माना जाता है कि सोशल मीडिया की वजह से उनमे डिप्रेशन और आत्महत्या करने की भावना भी बढ़ी है। पिछले दशक में भारत में जिस तरह से बच्चों द्वारा सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ा है उसी तरह से उनमे आत्महत्या की दर भी बढ़ी है।

डिप्रेशन को युवाओं तथा बच्चों में होने वाली प्रमुख मानसिक समस्याओं में से एक माना जाता है। अगर डिप्रेशन पर ध्यान नहीं दिया गया या इसे दरकिनार किया गया तो इससे बच्चे के मन में आत्महत्या की भावना जागृत हो सकती है और वह इस जघन्य अपराध भी कर सकता है। इसलिए यह कहा जा सकता है जितना सोशल मीडिया का इस्तेमाल बढ़ा है उतनी ही आत्महत्या की दर भी बढ़ी है।  

इसके अलावा गैर आत्महत्या वाली चोटे भी युवाओं में  14% से 21% के बीच बढ़ी हैं। तथ्यों के अनुसार खुद को नुकसान पहुंचाने वाले बच्चे ऑनलाइन सोशल नेटवर्क पर उन युवाओं की तुलना में ज्यादा सक्रिय रहते हैं जो खुद को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। ऑनलाइन सोशल नेटवर्किंग की भूमिका किशोरों में सेल्फ हार्म (आत्म-नुकसान) और आत्महत्या जैसे नकारात्मक प्रभावों को जानने के लिए एक अध्ययन किया गया। 

रिसर्च में पता चला कि ऑनलाइन सोशल नेटवर्किंग से यूजर को खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाले नकारात्मक संदेश मिलने, अन्य लोगों के साथ हिंसक व्यवहार करने और ऐसे वीडियो शेयर करने जिसमे खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा कंटेंट हो आदि से सेल्फ हार्म और सुसाइड की भावना में वृद्धि हुई है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर ज्यादा समय बिताने से साइकोलॉजिकल समस्या, मानसिक स्वास्थ्य ख़राब होना, खुद का सही से ख्याल न रख पाना और आत्महत्या के ट्रेंड में बढ़ोत्तरी होती है।

ऑनलाइन सोशल नेटवर्किंग पर बिताया गया ज्यादा समय कमजोर किशोरों में खुद को नुकसान पहुंचाने के व्यवहार और आत्महत्या के विचार को बढ़ावा देता है। ऐसे में अपने बच्चों को सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए किस तरह से सुरक्षित रखा जा सकता है जानते हैं डॉ. ज्योति कपूर, (फाउंडर और सीनियर साइकेट्रिस्ट, मन:स्थली वेलनेस) से।  

बच्चों को सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए इस तरह रखें सुरक्षित-
– पैरेंट्स सबसे पहले यह जानने कि कोशिश करें कि उनका बच्चा कौन सा प्रोग्राम या ऐप का इस्तेमाल कर रहा है। कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उम्र से सम्बंधित पाबंदियां होती हैं लेकिन बच्चे वहां पर भी पहुंच जाते हैं। ऐसे में यह पता होना बेहद जरूरी है कि आपका बच्चा इंटरनेट पर क्या खोज रहा है। 
– अपने बच्चे की ऑनलाइन लाइफ के बारे में दिलचस्पी दिखाएं और उनसे सवाल जवाब करें। 
– अगर संभव हो तो टैबलेट और कंप्यूटर को घर के कॉमन एरिया वाली जगह पर रखवाएं जहां आप अपने बच्चे को इस्तेमाल करते हुए देख सकें। 
– ऐसे प्रोग्राम को अपनाएं जो वेबसाइट को ब्लॉक कर सकते हों, टाइम लिमिट लगा सकते हों आदि। आपका बच्चा किन किन वेबसाइट पर जा रहा है उस पर नज़र रखें, और वह ऑनलाइन किससे बात कर रहा है इस पर भी नज़र रखें। 
– आपका बच्चा जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चला रहा हो उसे फालो करें। इसके बाद उन्हें बताएं कि आप उनकी सोशल लाइफ पर नज़र रख रहे हैं ताकि वे सुरक्षित रह सकें। कुछ बच्चे अपने मां-बाप को गुमराह करने के लिए फेक एकाउंट भी बना सकते हैं। 
– उनसे उन लोगों के बारे में पूछें जिनसे वे ऑनलाइन चैट करते हैं। आपके द्वारा  दिलचस्पी दिखाने से उन्हें इस बारे में बात करने में सहज महसूस करने में मदद मिलेगी। 
– ऑनलाइन दोस्ती को ऑनलाइन दुनिया में ही रखने के महत्व के बारे में उन्हें समझाएं। जब भी आपका बच्चा किसी ऑनलाइन मित्र से व्यक्तिगत रूप से मिलना चाहता है, तो उसे किसी पब्लिक प्लेस में किसी वयस्क के साथ ही मिलने दें। 
– बच्चों को समझाएं कि सोशल मीडिया पर क्या पोस्ट करना सही है और क्या गलत है। ऑनलाइन पोस्ट हमेशा के लिए ऑनलाइन रहती हैं। आपके बच्चे को ऐसा कुछ भी पोस्ट नहीं करना चाहिए जो वह नहीं चाहेगा कि माता-पिता या शिक्षक उसे देखें या पढ़ें।
– लोग यह नियंत्रित नहीं कर सकते हैं कि दूसरे उनके बारे में क्या पोस्ट करते हैं। उन्हें समझाएं कि जो फोटो या जानकारी सोशल मीडिया पर रहती है वह सालों बाद उन्हें परेशान कर सकती है। 
– उन्हें समझाएं कि ऑटोकरेक्ट से कभी-कभी किसी की भावना आहत हो सकती है और अफवाह भी फ़ैल सकती है।
–  कुछ बच्चे डेटिंग साइट पर डेट पर जाने या सेक्सुअल जरुरत को पूरा करने के लिए पार्टनर ढूढ़ सकते हैं। उन्हें सुरक्षित और सही रिश्ता ढूढ़ने के बारे में समझाएं। 

सोशल मीडिया की लत का लक्षण पहचानें- 
डायग्नोस्टिक एंड स्टैटिस्टिकल मैनुअल ऑफ मेंटल डिसऑर्डर (डीएसएम) -5 में बताये गए लत  के 11 मानदंडों का उपयोग करके लत को हल्के से गंभीर तक मापा जाता है। जो लोग दो या उससे कम मानदंडों को पूरा करते हैं उन्हें हल्के (आदी नहीं) के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा और छह या ज्यादा मानदंडों को पूरा करने वालों को सब्सटांस यूज डिसऑर्डर से पीड़ित माना जाता है।

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