Tuesday, October 4, 2022
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थाणे का ‘भाई’; फैमिली मैन और यारों का यार, कुछ ऐसी है मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शख्सियत

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दुनिया के लिए भले ही शिंद महाराष्ट्र के सीएम हों, लेकिन ठाणे वालों के लिए वे ‘भाई’ ही हैं, जो 10 दिन बाद गुरुवार को विजयी होकर घर लौटे हैं। शपथ लेते समय उनका घर किसी पर्यटक आकर्षण से कम नहीं था।

महाराष्ट्र के नवनियुक्ति मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे कुछ साल पहले जब केवल विधानसभा के सदस्य थे, उस समय वरिष्ठ पत्रकार मिलिंद बल्लाल ने उनका इंटरव्यू लिया था। दिलचस्प बात यह है कि इंटरव्यू में शिंदे अपनी पत्नी के साथ मौजूद थे। बल्लान ने बताया, “मैंने उनसे पूछा कि आपकी पसंदीदा एक्स्ट्रेस कौन है। शिंदे ने अपनी पत्नी की ओर देखा और शरमा गए, फिर मुझसे अगले प्रश्न पर जाने को कहा। लेकिन मैंने दोबारा पूछा कि माधुरी दीक्षित, हेमा मालिनी या वहीदा रहमान… कौन आपकी पसंदीदा अभिनेत्री हैं? वह फिर शरमा गए। यह उन लोगों के लिए असली शिंदे हैं जो उन्हें जानते हैं। शिंदे बहुत ही सरल, डाउन-टू-अर्थ और जोशीले व्यक्ति हैं।”

दशकों से शिंद के साथ काम करने वाले शिवसैनिकों ने बताया कि उन्हें मक्खन वाले टोस्ट के बजाय खारी के साथ चाय पीना पसंद है। वह वड़ा पाव भी शौक से खाते हैं। विदेशी व्यंजन उन्हें कुछ खास पसंद नहीं हैं। शिंदे के एक करीबी दोस्त ने बताया कि उन्हें पकोड़े की एक प्लेट मिल जाए और तो वह खुश हो जाते हैं। उन्हें पुरानी हिंदी और मराठी फिल्में देखना और पुराने गाने सुनना अच्छा लगता है।

’10 दिन बाद विजयी होकर घर लौटे शिंदे’
दुनिया के लिए भले ही वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हों, लेकिन ठाणे वासियों के लिए वे उनके ‘भाई’ ही हैं, जो 10 दिन बाद गुरुवार को विजयी होकर घर लौटे हैं। शिंदे लैंडमार्क सोसाइटी के सुभादीप बंगले में रहते हैं। शपथ लेते समय यह किसी पर्यटक आकर्षण से कम नहीं था। महाराष्ट्र के पहले परिवार के आवास की एक झलक पाने के लिए लोग काफी उत्साहित थे। पहली बार ठाणे के निवासी मुख्यमंत्री के अपने पड़ोसी होने का दावा कर सकते हैं।

बल्लाल ने कहा, “जब वह लोगों के साथ होते हैं तो सफेद कुर्ते में दिखाई देते हैं। हालांकि, जब वह सार्वजनिक डोमेन में नहीं होते तो टी-शर्ट और ट्रैक पैंट में घूमना पसंद करते हैं। वह पूजा या गणेशोत्सव के अवसर पर लोगों के घर भी जाते हैं और संबंध बनाए रखते हैं।”

दोस्त की इच्छा पूरी करने के लिए सेना की पोस्टिंग से चूके
शिंद के एक दोस्त ने बताया कि कैसे वह उसकी इच्छा को पूरा करने के लिए सेना की पोस्टिंग से चूक गए। उन्होंने कहा, “80 के दशक की शुरुआत में उन्हें सेना की पोस्टिंग के लिए फोन आया और उन्हें उत्तर में कहीं शिविर में शामिल होने के लिए कहा गया। उन्होंने अपना सामान पैक किया और ठाणे स्टेशन से ट्रेन में चढ़ गए। वह ट्रेन में एक दोस्त से मिले, जिसने जोर देकर कहा कि वह पंजाब में उसकी बहन की शादी में शामिल हों। शिंदे शादी में शामिल होने के लिए ट्रेन से उतर गए। लेकिन, जब तक वह कैंप पहुंचे, तब तक ओपनिंग बंद हो चुकी थी। वह भले ही ‘सैनिक’ न बन सके, लेकिन बाद में शिवसैनिक बन गए।”

शिंदे एक फैमिली मैन हैं, यह गुरुवार को भी दिखा जब वह अपने पोते रुद्रांश के साथ नजर आए। राजनीति के बाद खेती उनका दूसरा प्यार है। ठाणे के वरिष्ठ पत्रकार शशिकांत कोठेकर ने कहा, “शिंदे का खेती के प्रति प्रेम जगजाहिर है। महीने में हर दो से तीन दिन वह सतारा के डेरे गांव में अपने खेतों में जाते हैं। टी-शर्ट पहनकर वह किसी भी अन्य किसान की तरह ही अपने खेत में काम करते हैं। पहले वह सड़क मार्ग से जाते थे, लेकिन मंत्री बनने के बाद हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करने लगे जो डेयर स्कूल के मैदान में उतरता है।”

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