Thursday, February 9, 2023
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सस्पेंस से भरा रहा कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव, इन 5 मौकों पर चौंक गई देश की सबसे पुरानी पार्टी

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लगभग 25 वर्षों के बाद कांग्रेस एक गैर-गांधी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में चुनने के लिए तैयार है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर सोमवार को एक ऐतिहासिक चुनावी मुकाबले में आमने-सामने हैं। फिलहाल पार्टी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सोनिया गांधी के पास है। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए मतदान सुबह 10 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगा। मतदान के नतीजे 19 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे। दो दशकों में यह पहली बार होगा जब पार्टी का कोई निर्वाचित अध्यक्ष होगा। 2000 में सोनिया गांधी ने जितेंद्र प्रसाद को हराकर कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था।

कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से हटे अशोक गहलोत
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष बनने की दौड़ में सबसे आगे थे। उन्होंने औपचारिक रूप से 22 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की थी। बाद में 29 सितंबर को राजस्थान संकट पर उथल-पुथल के बीच सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए चुनाव से खुद को अलग कर लिया। इससे पहले गहलोत को गांधी परिवार का समर्थन प्राप्त था।

राजस्थान राजनीतिक संकट
अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने के बाद अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, यह निर्णय सोनिया गांधी और कांग्रेस के राजस्थान प्रभारी अजय माकन द्वारा लिया जाएगा। हालांकि, अशोक गहलोत खेमे के करीब 90 से अधिक विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को अपना इस्तीफा सौंपने के साथ राजस्थान में विद्रोह कर दिया। ये विधायक इस बात से खफा थे कि केंद्रीय नेतृत्व किसी ऐसे व्यक्ति को चुन रहा है जिसने 2020 में पार्टी के खिलाफ बगावत की और उस समय पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहने वालों के हितों की अनदेखी कर रहा था। वे सचिन पायलट के नाम से नाराज थे।

सोनिया गांधी के साथ बैठक के बाद दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि उन्होंने सोनिया गांधी से माफी मांगी और कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने 30 सितंबर को जयपुर में विधायकों की बैठक के बहिष्कार के लिए नैतिक जिम्मेदारी भी ली। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी उनके मुख्यमंत्री बने रहने का फैसला करेंगी।

जब मैदान में उतरे दिग्विजय सिंह
अशोक गहलोत के दौड़ से बाहर होने के साथ ही इस पद के लिए चुनाव को लेकर सस्पेंस बन गया था। इस बीच मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 29 सितंबर को पार्टी अध्यक्ष चुनाव के लिए नामांकन पत्र लेकर आए। उन्होंने पर्चा दाखिल करने की घोषणा भी की थी। कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपने सहयोगियों मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की थी। लेकिन जैसे ही खड़गे का नाम सामने आया, उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। 

दिग्विजय सिंह ने कहा, ‘खड़गे जी मेरे नेता और मेरे वरिष्ठ हैं। मैंने कल उनसे पूछा था कि क्या वह चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने ना कहा। मैं आज फिर उनसे मिला। मैंने उनसे कहा कि अगर आप चुनाव लड़ रहे हैं तो मैं पूरी तरह आपके साथ हूं। मैं उनके खिलाफ चुनाव लड़ने के बारे में नहीं सोच सकता। वह अपना नामांकन दाखिल कर रहे हैं और मैं उनका प्रस्तावक बनूंगा।’

मल्लिकार्जुन खड़गे ने भरा पर्चा
जैसे ही दिग्विजय सिंह दौड़ से बाहर हुए कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने 30 सितंबर को पार्टी अध्यक्ष पद के लिए दिल्ली में एआईसीसी मुख्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया। उन्होंने केरल के सांसद शशि थरूर को चुनौती दी है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दौड़ से हटने के बाद एक खड़गे गांधी परिवार के वफादार और आलाकमान की शीर्ष पसंद के रूप में उभरे हैं। उनकी उम्मीदवारी का प्रस्ताव अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह, प्रमोद तिवारी, पीएल पुनिया, एके एंटनी, पवन कुमार बंसल और मुकुल वासनिक जैसे कई नेताओं ने भी किया था। जी23 के नेताओं में आनंद शर्मा और मनीष तिवारी प्रस्तावकों में शामिल थे।

शशि थरूर ने पार्टी अध्यक्ष पद के लिए दाखिल किया नामांकन
कांग्रेस नेता और केरल के सांसद शशि थरूर ने भी 30 सितंबर को कांग्रेस अध्यक्ष चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। उन्होंने पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री को अपने कागजात सौंपे। उन्होंने कहा कि परिवर्तन चाहने वालों को उन्हें वोट देना चाहिए। थरूर ने कहा, ‘यह एक दोस्ताना मुकाबला है। हम दुश्मन या प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं। उनका कोई अनादर नहीं, लेकिन मैं अपने विचारों का प्रतिनिधित्व करूंगा।’

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