Monday, May 23, 2022
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कांग्रेस क्या कहती है वह अहम नहीं, उन पर दया आती है; ‘कश्मीर फाइल्स’ पर केरल कांग्रेस के ट्वीट पर बोले अनुपम खेर…

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जम्मू-कश्मीर पर बनी फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ को लेकर आई केरल कांग्रेस के बयान पर अब अभिनेता अनुपन खेर ने पलटवार किया है। अनुपम खेर ने कहा कि फिल्म को लेकर केरल कांग्रेस ने जो कहा है वह महत्वपूर्ण नहीं है। खेर ने आगे कहा कि हमारे देश में लोकतंत्र में हैं, सभी को संवैधानिक अधिकार है, इसलिए उन्हें बोलने दें। मुझे उन पर दया आती है।

केरल कांग्रेस के ट्वीट का जवाब दते हुए अनुपम खेर ने कहा इस फिल्म से जिस तरह का प्यार पैदा हुआ है, जिस तरह के लोग इस फिल्म को देखने जा रहे हैं, केरल कांग्रेस ने जो कहा है, वह महत्वपूर्ण नहीं है। मुझे लगता है कि वे यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि फिल्म के अभिनेताओं या निर्देशक की क्या राय है। मैं उन्हें वह खुशी नहीं देना चाहता।’

बता दें कि रविवार को केरल कांग्रेस ने ट्वीट कर कहा ‘कश्मिरी पंडितों के बारे में तथ्य: वह आतंकी ही थे जिन्होंने पंडितों को निशाना बनाया। पिछले 17 सालों (1990-2007) में हुए आतंकि हमलों में 399 पंडित मारे गए है। इसी अवधि में आतंकवादियों की ओर से मारे गए मुसलमानों की संख्या 15,000 है।’

उन्होंने कहा, “हमारे देश में लोकतंत्र है, सभी को संवैधानिक अधिकार हैं, इसलिए उन्हें बोलने दें। लेकिन धीरे-धीरे ऐसा लगता है कि कोई उनकी बात नहीं सुन रहा है क्योंकि वे देश हित में कुछ भी नहीं बोलते हैं। वे इस बारे में बात नहीं करते कि देश को कैसे आगे बढ़ाया जाए। उनकी हर बात में विनाश होता है, कोई रचनात्मक बात नहीं होती। तो हम ऐसे लोगों के बारे में क्यों बात करें जिन्हें देश के लिए कोई प्यार नहीं है और उन लोगों के लिए कोई प्यार नहीं है जो अपने ही देश में शरणार्थी के रूप में रह रहे हैं? मुझे उन पर दया आती है। दुर्भाग्य से, वे बहुत दयनीय स्थिति में हैं।’

खेर ने कश्मीरी पंडित के रोल को लेकर कहा कि कश्मीर फाइल्स’ मेरे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह मेरे लिए एक जख्म है जो सालों से नहीं भरा गया है और यह कभी नहीं भर सकता है। 32 साल पहले जिस तरह का जीवन मेरे रिश्तेदार, दोस्त जिये है, जब उन्हें उनके घरों, पर्यावरण, नौकरी, शहर और गांवों से निकाल दिया गया था। बाद में उनकी त्रासदी को देश के लोगों ने स्वीकार नहीं किया। मैं उन सभी 5 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा था, जिनका पलायन 19 जनवरी 1990 को हुआ था।’

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