Tuesday, June 18, 2024

क्यों मनाई जाती है Chaitra Navratri? जाने इसके पीछे की वजह

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तनिशा भारद्वाज

न्यूज़ डेस्क : (GBN24)

Chaitra Navratri की शरुवात 9 अप्रैल से होनी है. Chaitra Navratri के त्योहार, जिसे देवी दुर्गा की उपासना और आराधना के रूप में मनाया जाता है। यह पवित्र नौ दिनों का त्योहार है, जिसमें भक्त नौ देवियों को नौ रूपों में पूजते हैं. आपको बता दे Chaitra Navratri के दौरान, मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ती रहती है विभिन्न भवनों और मंदिरों में उपवास, पूजा और भजन-कीर्तन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। धार्मिक और सामाजिक उत्सव के रूप में यह त्योहार लोगों को आत्मिक शक्ति और ऊर्जा प्रदान करता है. इसके साथ ही यहां पर लोग विशेष रूप से नौवें दिन में हवन और कन्या पूजन का आयोजन करते हैं, जिसमें नौ युवतियों को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है. Navratri के इस महोत्सव में, धार्मिक और सामाजिक सामूहिकता का आनंद उत्सव के रूप में महसूस होता है, जो लोगों को आत्मनिर्भर बनाता है और उन्हें प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के साथ जोड़ता है.

जैसा की सब जानते है की हिन्दू धर्म तरह – तरह की संस्कृति और परम्पराओं से भरा है, और ऐसे में Chaitra Navratri का महत्व हिंदू धर्म में विशेष माना जाता है यह त्योहार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के पहले दिन से आरंभ होता है और नौ दिन तक चलता है। Chaitra Navratri का मुख्य उद्देश्य माँ दुर्गा की पूजा और उनके नौ रूपों की आराधना करना है। इस अवसर पर लोग माँ दुर्गा की भक्ति और आराधना में लगे रहते हैं और उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति की आशा करते हैं। Chaitra Navratri के इस पवित्र अवसर पर लोग उपवास, पूजा, भजन-कीर्तन आदि के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। यह त्योहार हिंदू संस्कृति में महत्वपूर्ण है और समाज में एकता, आदर्शता और धार्मिकता को बढ़ावा देता है. लेकिन Navratri के व्रत करना इतना भी आसान नहीं नहीं है:

Navratri के दौरान अनाज, दाल, प्याज और लहसुन का त्याग करना आव्यशक है. और Navratri में पूजा का आयोजन, Navratri के दौरान नियमित ध्यान और पूजा, विशेषकर माँ दुर्गा की, अत्यंत महत्वपूर्ण है। मंदिरों की यात्रा करना और आरती उतारना सामान्य प्रथा है. साथ ही Navratri के दौरान पारंपरिक वस्त्र पहनना, विशेषकर लाल, पीला और हरा जैसे उज्ज्वल रंगों का उपयोग करना, प्रसिद्ध है।

दान करना: दान करना और जरूरतमंदों की मदद करना Navratri के दौरान बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है।

गरबा और डांडिया रास में भाग लेना: Navratri की रातों में होने वाले लोक नृत्यों गरबा और डांडिया रास में भाग लेना, एक लोकप्रिय गतिविधि है।

आपको बतादें की हिंदू परंपरा में, “Chaitra Navratri” और “शरद Navratri” के बीच कोई विशेष अंतर नहीं है। “Chaitra Navratri” वह Navratri उत्सव है जो हिंदू माह चैत्र में मनाया जाता है, जो सामान्यत: मार्च या अप्रैल में होता है। यह वर्ष का पहला Navratri के रूप में जाना जाता है. हालांकि, “दूसरी नवरात्रि” शरद Navratri को संदर्भित कर सकता है, जो सितंबर या अक्टूबर के आसपास होता है और मुख्य Navratri उत्सव के रूप में माना जाता है, या यह किसी और समय पर वर्ष में बाद में मनायी जाने वाली Navratri को संदर्भित कर सकता है। दूसरी Navratri का महत्व स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के आधार पर भिन्न हो सकता है.

Navratri का उत्सव समाप्त होते हुए हम एक महत्वपूर्ण संदेश लेकर आते हैं। यह त्योहार हमें आत्मनिर्भरता, शक्ति और समर्पण की शिक्षा देता है। माँ दुर्गा की पूजा और आराधना से हमें नैतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के इस पवित्र अवसर पर हमें समाज में एकता, सहयोग और धर्मनिरपेक्षता के महत्व को समझना चाहिए। इस पावन पर्व के संदेश को अपने जीवन में अमल में लाकर हम सच्चे धर्म और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।

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