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FCRA Amendment Bill JPC के पास भेजा गया, 31 सदस्य करेंगे जांच; लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सांसद

FCRA Amendment Bill JPC के पास भेजा गया, 31 सदस्य करेंगे जांच; लोकसभा से 21 और राज्यसभा से 10 सांसद

विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक 2026 : संसद के मानसून सत्र में विदेशी चंदे से जुड़े कानून को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है।विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 (Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 )को विस्तृत जांच और विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज दिया गया है। लोकसभा में बुधवार, 12 अगस्त को इस संबंध में प्रस्ताव मंजूर किया गया।

इस संयुक्त संसदीय समिति में कुल 31 सदस्य होंगे। इनमें 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से लिए जाएंगे। अब समिति विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी और अपनी सिफारिशें संसद के सामने रखेगी।

क्या है FCRA संशोधन विधेयक?

FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act जिसे हिंदी में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 कहते हैं। यह विदेशी फंडिंग और चंदे को नियंत्रित करने वाला कानून है। इसके दायरे में विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले संगठन, संस्थाएं और एनजीओ आते हैं।2026 का संशोधन विधेयक मौजूदा कानून में कई बदलाव प्रस्तावित करता है। खास तौर पर इसका उद्देश्य ऐसी स्थिति के लिए एक व्यवस्था तैयार करना है, जब किसी संगठन का FCRA प्रमाणपत्र समाप्त हो जाए, रद्द कर दिया जाए या उसका नवीनीकरण नहीं हो पाए। ऐसी स्थिति में विदेशी योगदान और उससे जुड़ी संपत्तियों के प्रबंधन और निपटारे के लिए एक Designated Authority की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

JPC में होंगे 31 सांसद

विधेयक को अब संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजे जाने के बाद इसकी जांच केवल एक सदन तक सीमित नहीं रहेगी। समिति में दोनों सदनों के सांसद शामिल होंगे। JPC में 21 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से होंगे। समिति विधेयक के अलग-अलग प्रावधानों पर विचार करेगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्षों, विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों की राय भी ले सकती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें संसद को सौंपेगी।

सरकार ने क्यों भेजा JPC के पास?

दरअसल, FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे थे। विपक्षी दलों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है और सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग की थी।

ऐसे में विधेयक को JPC के पास भेजने से इसके प्रावधानों की ज्यादा विस्तार से जांच का रास्ता खुल गया है। सरकार की ओर से भी यह संकेत दिया गया है कि विधेयक पर व्यापक संसदीय विचार-विमर्श हो सकता है।

विधेयक में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?

FCRA Amendment Bill 2026 का एक प्रमुख प्रस्ताव उन संगठनों से जुड़ा है जिनका FCRA पंजीकरण समाप्त हो जाता है। बिल में ऐसी स्थिति में विदेशी योगदान और संबंधित संपत्तियों की निगरानी, प्रबंधन और निपटारे के लिए एक विशेष व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, विदेशी फंड के इस्तेमाल और उससे जुड़ी जवाबदेही को लेकर नियामकीय ढांचे को और व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है। हालांकि, विधेयक के अंतिम प्रावधानों में क्या बदलाव होंगे, यह JPC की जांच और उसकी सिफारिशों के बाद ही ज्यादा स्पष्ट होगा।

विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?

विपक्षी दलों का कहना है कि FCRA से जुड़े नियमों में बदलाव का सीधा असर विदेशी फंड हासिल करने वाले संगठनों और संस्थाओं पर पड़ सकता है। इसलिए वे विधेयक पर पर्याप्त चर्चा और जांच की मांग कर रहे हैं।

कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार पर जल्दबाजी में विधेयक को आगे बढ़ाने का आरोप भी लगाया है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि विधेयक को JPC के पास भेजने से उसकी जांच और बेहतर तरीके से हो सकेगी।

इस तरह, विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद के बावजूद अब इसे संसदीय समिति के स्तर पर विस्तार से जांचने का रास्ता खुल गया है।

अब आगे क्या होगा?

अब JPC FCRA Amendment Bill 2026 के प्रावधानों का अध्ययन करेगी। समिति अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा कर सकती है और संबंधित विशेषज्ञों या हितधारकों से सुझाव भी ले सकती है।

इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी। रिपोर्ट में दिए गए सुझावों के आधार पर सरकार विधेयक में बदलाव कर सकती है। फिर विधेयक को आगे की संसदीय प्रक्रिया के लिए लिया जाएगा। यानी फिलहाल FCRA Amendment Bill कानून नहीं बना है। इसे पहले संसदीय समिति की जांच से गुजरना होगा। इसके बाद संसद में इसकी अगली प्रक्रिया तय होगी।

FCRA Amendment Bill 2026 को JPC के पास भेजना इस विधेयक की संसदीय यात्रा में महत्वपूर्ण कदम है। 31 सदस्यीय समिति में दोनों सदनों के सांसद शामिल होंगे। अब समिति विदेशी फंडिंग से जुड़े प्रस्तावित बदलावों की बारीकी से जांच करेगी। इससे विधेयक पर सरकार और विपक्ष के बीच चल रही बहस को भी एक औपचारिक संसदीय मंच मिल गया है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि JPC अपनी रिपोर्ट में क्या सिफारिश करती है और सरकार उन सुझावों को किस तरह शामिल करती है।

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