सुप्रीम कोर्ट की फटकार: ‘साजिश’ का शक गहराया
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त बड़ा तूफान खड़ा हो गया है। मामला मालदा का है, जहाँ वोटर लिस्ट सुधार के दौरान ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने देश की सबसे बड़ी अदालत को भी सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया। बताया जा रहा है कि कोर्ट से जुड़े अधिकारियों को 8 घंटे से ज्यादा समय तक घेर कर रखा गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को सामान्य नहीं माना, बल्कि इसे एक सुनियोजित साजिश बताते हुए कहा कि यह अधिकारियों को डराने और काम में बाधा डालने की कोशिश थी।
चुनाव आयोग बनाम राज्य सरकार: टकराव चरम पर
इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग और ममता सरकार के बीच तनातनी भी खुलकर सामने आ गई है। आयोग का आरोप है कि राज्य सरकार के कुछ लोग चुनावी प्रक्रिया में लगे अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं। वहीं, खबरों में यह भी सामने आया कि मुख्यमंत्री की ओर से आयोग को लेकर कड़ी और विवादित टिप्पणी की गई। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि सुप्रीम कोर्ट को खुद वोटर लिस्ट सुधार प्रक्रिया की निगरानी अपने हाथ में लेनी पड़ी।
ED का आरोप: I-PAC रेड में बाधा और सबूतों से छेड़छाड़
इसी बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। एजेंसी का कहना है कि जनवरी में I-PAC कार्यालय में छापेमारी के दौरान प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप किया गया। आरोप है कि इस दौरान न सिर्फ जांच में बाधा डाली गई, बल्कि संभावित सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी की गई। इस खुलासे ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल और तेज हो गई है।
महिलाओं को ‘मुकाबले’ के लिए उकसाने पर विवाद
सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री के उस बयान को लेकर हो रही है जिसमें उन्होंने महिलाओं से पोलिंग बूथ पर ‘घर का सामान’ साथ लाने की बात कही थी। उनका तर्क था कि सुरक्षा बल, खासकर CRPF, लोगों को डराने का काम करते हैं, इसलिए महिलाओं को खुद अपनी सुरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि, इस बयान को लेकर अब कानून और सुरक्षा एजेंसियां गंभीर चिंता जता रही हैं और इसे चुनावी माहौल को भड़काने वाला कदम मान रही हैं।













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