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सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाने पर पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाने पर पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से अस्पताल ले जाने के बाद कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला

दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के पैरोकार सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम पर पहली बार आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले दिल्ली पुलिस आयुक्त बदले गए और उसके अगले ही दिन यह कार्रवाई हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम कई सवाल खड़े करता है।

पवन खेड़ा ने क्या कहा?

पवन खेड़ा ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। उनका कहना था कि जब कोई नागरिक अपनी मांगों को लेकर अनशन करता है, तब लोकतांत्रिक सरकार का दायित्व होता है कि वह उसकी बात सुने, न कि उसे नजरअंदाज करे। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त में बदलाव के एक दिन बाद जिस तरह की कार्रवाई हुई, उससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।

सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों ले जाया गया?

दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को उस समय अस्पताल पहुंचाया, जब उनका आमरण अनशन 20 दिन से अधिक समय तक जारी रहा और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। पुलिस का कहना है कि यह कदम दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों और डॉक्टरों की सलाह के आधार पर उठाया गया, ताकि उन्हें आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन प्रदर्शन स्थल से हटाया गया।

कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना

पवन खेड़ा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जिम्मेदारी संवाद स्थापित करने की होती है। उन्होंने दावा किया कि पहले की सरकारें भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों से बातचीत करती रही हैं, लेकिन मौजूदा सरकार ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सोनम वांगचुक की मांगों और शिक्षा सुधार से जुड़े मुद्दों को पहले से उठाती रही है।

स्वास्थ्य को लेकर जताई चिंता

कांग्रेस नेता ने बताया कि उन्होंने जंतर-मंतर पहुंचकर सोनम वांगचुक से मुलाकात की थी और उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अनशन समाप्त करने की भी अपील की थी। उनके अनुसार, किसी भी आंदोलन के लिए उसके नेतृत्व का सुरक्षित रहना जरूरी है और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा जा सकता है।

आंदोलन पर बनी हुई है नजर

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद भी जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन और आगामी कार्यक्रम पहले से तय योजना के अनुसार जारी रहेंगे। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी लगातार सामने आ रही हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार की अगली रणनीति और आंदोलन के अगले कदम पर बनी हुई है।

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