प्राइवेट स्कूल: सेवा या व्यवसाय?
भारत में स्कूलों को आमतौर पर एक चैरिटेबल संस्था के रूप में स्थापित किया जाता है, ताकि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई निजी स्कूल—खासतौर पर CBSE, IB और Cambridge बोर्ड वाले—अब बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाने लगे हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, मध्यम वर्ग की बढ़ती उम्मीदें और बेहतर सुविधाओं की मांग ने शिक्षा को कहीं-न-कहीं एक बाज़ार आधारित मॉडल में बदल दिया है।
थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्ट से लेकर एजुकेशन सर्विस कंपनियों तक
मुनाफा कमाने के कई तरीके प्राइवेट स्कूल अपनाते हैं। सबसे आम तरीका है थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्ट—जहां मेंटेनेंस, निर्माण या स्टडी मटीरियल के नाम पर बिल बढ़ाकर अतिरिक्त पैसा निकाला जाता है। इसके अलावा कई स्कूल अपनी ‘एजुकेशन सर्विस कंपनियां’ भी बनाते हैं, जो ट्रेनिंग, वर्कशॉप या करिकुलम डेवलपमेंट के नाम पर भारी शुल्क लेती हैं। इन सेवाओं पर 18% GST लगने से कई बार वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
लीज रेंट, सब-कॉन्ट्रैक्टिंग और डोनेशन का खेल
स्कूल प्रमोटर अक्सर अपनी ही जमीन स्कूल को महंगे किराए पर लीज पर देते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से मुनाफा बनता है। इसी तरह ट्रांसपोर्ट, सिक्योरिटी और हाउसकीपिंग जैसी सेवाओं को सब-कॉन्ट्रैक्ट कर कुछ कर बचत और लागत प्रबंधन किया जाता है। कई स्कूल डोनेशन और ग्रांट भी जुटाते हैं—जो शिक्षा में उपयोग होने चाहिए, लेकिन कई बार इनके उपयोग पर पारदर्शिता की कमी देखी जाती है।
फीस बढ़ोतरी, एडमिशन और नई स्कीमें
प्राइवेट स्कूलों का सबसे बड़ा मुनाफे का जरिया है—ट्यूशन फीस और एडमिशन। बढ़ती मांग के चलते स्कूल हर साल फीस बढ़ाते हैं और नई-नई गतिविधियां, इंटरनेशनल प्रोग्राम और टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स शुरू कर देते हैं। इससे उनकी ब्रांड वैल्यू भी बढ़ती है और आय भी। कई स्कूल ऑनलाइन कोर्स, व्यावसायिक ट्रेनिंग और इंटरनेशनल टाई-अप कर अपनी कमाई के रास्ते और विस्तृत कर रहे हैं।
रियल एस्टेट, EdTech पार्टनरशिप और भविष्य की चुनौती
कई निजी स्कूल रियल एस्टेट में भी कदम रखते हैं—जैसे कि अपनी जमीन पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाना। इसके अलावा EdTech कंपनियों से पार्टनरशिप कर डिजिटल लर्निंग के नाम पर प्रीमियम सेवाओं से भी कमाई होती है। पर सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शिक्षा का उद्देश्य कहीं मुनाफे की दौड़ में कमजोर न पड़ जाए। ऐसे समय में Erocon जैसे कंसल्टेंट संस्थान यह सुनिश्चित करते हैं कि स्कूल की कमाई सही दिशा में लगे, नियमों का पालन हो और शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे।













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