सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता का मुद्दा उठा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (24 नवंबर 2025) को उन याचिकाओं पर सुनवाई करने का फैसला किया है जिनमें राजनीतिक दलों को ₹2000 तक के नकद चंदे लेने से रोकने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि हर प्रकार का राजनीतिक चंदा—चाहे राशि कितनी भी हो—आयकर नियमों के दायरे में लाया जाना चाहिए और पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।
याचिका में उठाए गए सवाल
याचिका में आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13A(d) को चुनौती दी गई है, जो राजनीतिक दलों को ₹2000 तक नकद चंदा लेने की अनुमति देती है। याचिकाकर्ता खेमा सिंह भाटी ने कहा कि यह प्रावधान “पारदर्शिता को खत्म करता है” क्योंकि कोई भी व्यक्ति बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर ₹2000 के नकद दान के रूप में राजनीतिक दलों को दे सकता है।
याचिका में इसे मतदाताओं के सूचना के अधिकार (Article 19(1)(a)) का उल्लंघन बताया गया।
ECI, केंद्र और 13 राजनीतिक दलों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट की पीठ—जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता शामिल थे—ने चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, CBDT और 13 प्रमुख राजनीतिक दलों (BJP, कांग्रेस, DMK, CPM, TMC, SP, AAP आदि) को नोटिस जारी किया है।
याचिका की मांग है कि सभी दलों को ₹2000 तक की नकद राशि देने वाले दाताओं का नाम, पता और विवरण सार्वजनिक करना चाहिए।
फॉर्म 24A की जांच की मांग
याचिका में चुनाव आयोग से मांग की गई है कि वह राजनीतिक दलों द्वारा हर साल जमा किए जाने वाले Form 24A की सख्त जांच करे। यह वही दस्तावेज़ है जिसमें दलों को ₹20,000 से ऊपर के दान का विवरण देना होता है।
याचिका में कहा गया है कि कई दल समय पर यह फॉर्म जमा नहीं करते और कई रिपोर्टें
अधूरी, गलत या अपूर्ण होती हैं।
उदाहरण के लिए:
• CPI(M) ने रिपोर्ट 43 दिन देर से जमा की
• BJP ने 42 दिन देर से
• कांग्रेस ने 27 दिन देर से
कई रिपोर्टों में दानदाताओं के पते, बैंक विवरण, PAN नंबर तक नहीं दिए गए थे।
राजनीतिक दलों के ऑडिट की मांग
याचिकाकर्ता ने मांग की कि राजनीतिक दलों के खाते चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त स्वतंत्र ऑडिटर्स से ऑडिट कराए जाएँ।
उन्होंने कहा कि कई दलों का बैंक ब्याज, फीस और सब्सक्रिप्शन से होने वाली आय का भी सही विवरण नहीं दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 2–3 हफ्तों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
अब देखना यह है कि क्या अदालत राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता पर कोई बड़ा फैसला देगी या राजनीतिक दलों को नकद चंदा व्यवस्था में बदलाव करना पड़ेगा।













Leave a Reply