बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचा घमासान चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। लंबे समय से पार्टी के अंदर असंतोष की खबरें सामने आ रही थीं, लेकिन अब मामला इस्तीफे तक पहुंच गया है। बारासात से टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने पार्टी संगठन के सभी पदों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। हालांकि उन्होंने साफ किया है कि वह फिलहाल पार्टी की सांसद और सदस्य बनी रहेंगी।
I-PAC और पार्टी रणनीति पर उठे सवाल
काकोली घोष ने बिना नाम लिए चुनावी रणनीति संभालने वाली एजेंसी I-PAC पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पार्टी में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि बाहरी लोगों को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति केवल मैनेजमेंट और एजेंसियों के भरोसे नहीं चलाई जा सकती, बल्कि जमीनी कार्यकर्ताओं की ताकत ही किसी पार्टी की असली पहचान होती है।
पार्टी में बढ़ते “क्रिमिनलाइजेशन” पर चिंता
टीएमसी सांसद ने पार्टी में बढ़ते “क्रिमिनलाइजेशन” पर भी चिंता जताई है। काकोली घोष का मानना है कि पार्टी को अपनी पुरानी राजनीतिक संस्कृति और कार्यकर्ताओं के भरोसे पर वापस लौटना होगा। उनके इस बयान ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर कई नेता मौजूदा कार्यशैली से खुश नहीं हैं। यही वजह है कि चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद लगातार नाराज़गी खुलकर सामने आ रही है।
शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात ने बढ़ाई अटकलें
राजनीतिक गलियारों में चर्चा इसलिए भी तेज हो गई है क्योंकि हाल ही में काकोली घोष विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari की मौजूदगी वाली एक बैठक में नजर आई थीं। इसके बाद से ही अटकलें लगाई जा रही हैं कि टीएमसी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। अब काकोली घोष का इस्तीफा ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की रणनीति पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है, जिससे बंगाल की राजनीति में नया सियासी भूचाल देखने को मिल सकता है।







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