आस्था को कारोबार में बदलने का खेल
भारत में किसी एक “सबसे बड़े फ्रॉड बाबा” की पहचान नहीं हुई है, लेकिन इतिहास इस बात से भरा है कि कैसे कई स्वयंभू बाबाओं ने धर्म और आध्यात्मिकता को अरबों का धंधा बना दिया। लोग भक्ति और चमत्कार की उम्मीद में इन बाबाओं पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं, और यही भरोसा कभी-कभी सबसे बड़ा हथियार बन जाता है। असली आध्यात्मिक गुरुओं से अलग, कुछ फर्जी बाबा आस्था को पैसे, जमीन और सत्ता में बदल देते हैं।
जब आस्था बनी करोड़ों की तिजोरी: बड़े मामले
आसाराम बापू
एक समय के चर्चित गुरु आसाराम बापू और उनके बेटे नारायण साईं पर भारी संपत्ति इकट्ठा करने, जमीन कब्जाने और आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगे। 2013 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में गिरफ्तारी और सज़ा के बाद उनके साम्राज्य की असलियत सामने आई।
गुरमीत राम रहीम सिंह
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने करोड़ों की संपत्ति और विशाल फॉलोइंग बनाई। साध्वियों से बलात्कार के मामले में दोषी पाए जाने के अलावा, उनके संगठन पर जमीन कब्जाने और अवैध धन लेन-देन के आरोप लगे। गिरफ्तारी के बाद भड़के दंगों में कई लोगों की जान चली गई।
सन्तोष माधवन (स्वामी अमृता चैतन्य)
स्वयंभू आध्यात्मिक प्रेरक बताने वाले माधवन को 2008 में दो नाबालिगों के साथ रेप, धोखाधड़ी और पॉर्न वीडियो बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। UAE में हुई आर्थिक ठगी के मामले में इंटरपोल भी उसकी तलाश कर रहा था।
कैसे चलता है “आध्यात्मिक बिज़नेस मॉडल”
फर्जी बाबाओं का कारोबार किसी भी बड़ी कंपनी की तरह योजनाबद्ध होता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इनके द्वारा अपनाई जाने वाली सबसे आम कमाई की तरकीबें हैं:
हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग
धार्मिक ट्रस्ट टैक्स-फ्री होते हैं, इसी वजह से कई बार काले धन को छिपाने और हवाला के जरिए बाहर भेजने का साधन बन जाते हैं। धार्मिक प्रभाव की वजह से इन पर निगरानी भी कम रहती है।
पॉन्ज़ी और निवेश ठगी
कई बाबाओं ने “पैसा दोगुना”, “आध्यात्मिक निवेश” या “चमत्कारी रिटर्न” के नाम पर मल्टी-लेवल मार्केटिंग और पॉन्ज़ी स्कीम चलाई, जिसमें भक्तों की जीवनभर की बचत तक डूब गई।
तंत्र-पूजा और इलाज के नाम पर वसूली
कई मामलों में बाबा समस्याएँ दूर करने, बीमारी ठीक करने या पारिवारिक झगड़े ख़त्म करने के नाम पर करोड़ों की ठगी कर लेते हैं। हाल ही में पुणे में एक टेक्नीशियन को 7 वर्षों में ₹14 करोड़ की ठगी का शिकार बनाया गया।
क्यों यह भारत का सबसे तेज़ी से बढ़ता व्यापार बनता जा रहा?
यह “धार्मिक बिज़नेस” तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि:
• अंधविश्वास और भावनात्मक निर्भरता
• भक्तों का बिना सवाल किए दान देना
• जमीन, सोना और नकद चढ़ावे
• टैक्स छूट और धार्मिक ट्रस्ट के कानूनी फायदे
• लाखों फॉलोअर्स की ढाल, जिससे कार्रवाई मुश्किल हो जाती है
यह अनोखा मिश्रण—पैसा + ताकत + भावनात्मक नियंत्रण + कानूनी ढील—इसे देश का सबसे लाभकारी और तेजी से बढ़ता गुप्त बिज़नेस बनाता है।
जागरूकता और नियमों की ज़रूरत
भारत में कई वास्तविक और ईमानदार आध्यात्मिक संस्थान मौजूद हैं, लेकिन कुछ फर्जी बाबाओं के बढ़ते फ्रॉड यह दिखाते हैं कि धर्म के नाम पर चलने वाला यह अनियमित “बिज़नेस मॉडल” कितना खतरनाक हो रहा है। अधिक पारदर्शिता, कड़े कानून और जनता की जागरूकता जरूरी है ताकि कोई भी व्यक्ति विश्वास और भावनाओं के नाम पर ठगी का शिकार न हो।

















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