संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में आगामी सत्र का एजेंडा सभी राजनीतिक दलों के सामने रखा जाएगा। साथ ही, सदन को सुचारु रूप से चलाने के लिए विपक्ष से सहयोग की अपील भी की जाएगी। इस बीच, राजनीतिक गलियारों में बीजेपी के ‘मिशन-360’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी भविष्य की रणनीति और संसद में जरूरी संख्याबल को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।
क्या है बीजेपी का ‘मिशन-360’?
‘मिशन-360’ को बीजेपी की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल चुनावी जीत हासिल करना नहीं, बल्कि लोकसभा में इतना मजबूत संख्याबल जुटाना भी है कि बड़े और महत्वपूर्ण विधायी एजेंडे को आसानी से आगे बढ़ाया जा सके। हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों के लिए साधारण बहुमत से अधिक समर्थन की आवश्यकता होती है।
आखिर 6 को लेकर क्यों है चर्चा?
संविधान संशोधन जैसे विधेयकों को पारित कराने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। इसी कारण ‘मिशन-360’ के साथ अतिरिक्त छह सीटों की चर्चा भी लगातार हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संख्या भविष्य में बड़े विधायी फैसलों के लिए अहम साबित हो सकती है। यही वजह है कि पार्टी संगठन और सहयोगी दलों के साथ रणनीति को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य क्या है?
हर मानसून सत्र से पहले सरकार सभी राजनीतिक दलों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए सर्वदलीय बैठक आयोजित करती है। इस दौरान सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी देती है, जबकि विपक्ष उन मुद्दों से अवगत कराता है जिन्हें वह संसद में उठाना चाहता है। इसका मुख्य उद्देश्य सदन की कार्यवाही को सुचारु और प्रभावी बनाए रखना होता है।
मानसून सत्र में रह सकती है जोरदार राजनीतिक टक्कर
इस बार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। एक ओर बीजेपी अपने राजनीतिक लक्ष्य और संख्याबल पर फोकस बनाए हुए है। दूसरी ओर, विपक्ष भी सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार कर चुका है। ऐसे में संसद का यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम और गर्म रहने की उम्मीद है।













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