सरकार का बड़ा फैसला
असम सरकार ने बुधवार, 26 नवंबर को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की रिपोर्ट को मंजूरी दी, जिसमें छह प्रमुख समुदायों—ताई अहोम, चुतिया, मोरान, मोटोक, कोच-राजबोंगशी और टी ट्राइब्स (आदिवासी)—को अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जा देने की सिफारिश की गई थी। सरकार ने इसे आदिवासी समूहों के लिए दशक पुराने वादे की पूर्ति बताया।
मौजूदा आदिवासी समुदायों की प्रतिक्रिया
हालांकि सरकार का यह कदम स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए एक उपलब्धि माना गया, लेकिन मौजूदा आदिवासी समूह इसे अपनत्व और अस्तित्व पर खतरा मान रहे हैं। यह निर्णय बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) में तुरंत तनाव पैदा कर गया। छात्र संगठन इसे “राजनीतिक साजिश” और राज्य के मूल निवासियों के अधिकारों को कमजोर करने वाला कदम बता रहे हैं।
बोडोलैंड यूनिवर्सिटी में विरोध
गुरुवार, 27 नवंबर की सुबह, बोडोलैंड यूनिवर्सिटी, कोकराझार में स्थिति बिगड़ गई। यह विश्वविद्यालय बोडो समुदाय का बौद्धिक केंद्र है। बोडोलैंड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (BUSU) और असम के ट्राइबल ऑर्गनाइजेशन का कोऑर्डिनेशन कमेटी (CCTOA) के सदस्यों ने कैंपस पर कब्जा कर लिया।
छात्रों ने किया जोरदार प्रदर्शन
सुबह तक देबरगांव स्थित मुख्य द्वारों को अवरोधित कर दिया गया। सैकड़ों छात्रों ने नारे लगाए जैसे—“6 समुदायों के लिए ST दर्जा बंद करो,” “राज्य सरकार मुर्दाबाद,” और “एंटी-ट्राइबल वापस जाओ।” इस प्रदर्शन ने विश्वविद्यालय की गतिविधियों को मूल रूप से ठप कर दिया।
आगे की स्थिति और चिंताएं
छात्रों और मौजूदा आदिवासी समुदायों की सक्रियता ने असम में पहचान राजनीति और जातीय तनाव की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। सरकार की योजना और समुदायों की प्रतिक्रिया अब राज्य में राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।













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