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मणिपुर में ED की बड़ी कार्रवाई, कथित अलगाववादी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर शिकंजा

ED

इंफाल में पांच ठिकानों पर छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) की इंफाल सब-जोनल टीम ने मणिपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए याम्बेम बीरेन और नारेंगबाम समरजीत से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। एजेंसी ने इंफाल में कुल पांच अलग-अलग स्थानों की तलाशी ली, जो सलाइ ग्रुप ऑफ कंपनियों से जुड़े बताए जा रहे हैं। आरोप है कि याम्बेम बीरेन खुद को मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री और नारेंगबाम समरजीत खुद को विदेश और रक्षा मंत्री बताता था।

2019 की लंदन प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा मामला

यह मामला साल 2019 का है, जब लंदन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोपियों ने मणिपुर को भारत से अलग एक स्वतंत्र देश घोषित करने की बात कही थी। ED के अनुसार यह देश के खिलाफ साजिश, देशद्रोह और विभिन्न समुदायों के बीच नफरत फैलाने जैसा गंभीर अपराध है। इसी आधार पर NIA और CBI पहले ही इस मामले में केस दर्ज कर चुकी हैं।

अवैध तरीके से कैश में पैसा जुटाने का आरोप

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने पहले एक संस्था बनाई, जिसका नाम बाद में स्मार्ट सोसायटी रखा गया। इसके अलावा सलाइ फाइनेंशियल सर्विस (SAFFINS) नाम की संस्था भी बनाई गई। आरोप है कि इन संस्थाओं ने बिना कानूनी अनुमति के आम लोगों से कैश में पैसे जमा कराए और ज्यादा ब्याज का लालच दिया। स्मार्ट सोसायटी कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से NBFC की तरह काम कर रही थी।

₹57.36 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस तरह करीब 57.36 करोड़ रुपये भोले-भाले निवेशकों से इकट्ठा किए गए। यह पैसा बाद में आरोपियों और सलाइ ग्रुप की कंपनियों के खातों में डालकर जमीन-जायदाद खरीदने, लोन चुकाने और निजी खर्चों में इस्तेमाल किया गया। ED ने इस रकम को PMLA के तहत “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” बताया है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी पूरे नेटवर्क व धन के इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।

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