दो दशक बाद मिली आज़ादी
करीब 19 साल जेल में बिताने के बाद, निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को आखिरकार सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। मंगलवार को अदालत ने कोली को एक नाबालिग लड़की के रेप और हत्या के मामले में बरी कर दिया, जो उनके खिलाफ दर्ज अंतिम केस था।
गलत जांच और मजबूरन इकबाल-ए-जुर्म पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों की ओर से की गई त्रुटिपूर्ण जांच, दबाव में कराया गया कबूलनामा और सबूतों की कमी इस मामले में गंभीर चूक को दर्शाती है। 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी 12 अन्य मामलों में कोली को बरी किया था, यह कहते हुए कि जांच “बॉट्च्ड” यानी अव्यवस्थित थी।
जेल में चुपचाप बिताए साल
ग्रेटर नोएडा की कसना जेल में पिछले 14 साल से बंद कोली ज्यादातर समय सफाई करने और चुपचाप रहने में बिताता था। जेल अधिकारियों के अनुसार, वह किसी से बात नहीं करता था और अपना समय झाड़ू-पोंछा लगाने में निकालता था। उसके परिवार वाले भी शायद ही कभी उससे मिलने आते थे।
परिवार से टूटा रिश्ता, बदनाम नाम से बचते रहे परिजन
कोली के वकील युग चौधरी ने बताया कि निठारी कांड के बाद उसकी पत्नी और बच्चे उससे अलग हो गए, जबकि परिवार के बाकी सदस्य डर के कारण उससे मिलने भी नहीं आते थे। समाज में उसे “निठारी का नरभक्षी” कहा गया, जिससे उसका जीवन पूरी तरह बदल गया।
निठारी हत्याकांड की पृष्ठभूमि
दिसंबर 2006 में निठारी कांड तब सामने आया जब नोएडा में मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे से आठ बच्चों के कंकाल मिले थे। कोली, जो पंधेर का घरेलू नौकर था, को 13 मामलों में आरोपी बनाया गया था। अब सभी मामलों में उसकी बरी होने से यह मामला भारतीय न्याय व्यवस्था में गंभीर जांच त्रुटियों का उदाहरण बन गया है।

















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