दिल्ली में केरल के छात्रों पर हमला
दिल्ली के लाल किले के पास 24 सितंबर को दो मलयाली छात्रों पर दुकानदारों और पुलिस कर्मियों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। यह हमला कथित रूप से उनकी हिंदी न बोल पाने और lungi पहनने के कारण हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना को “पूरी तरह अस्वीकार्य नस्लीय भेदभाव” करार दिया है।
पुलिस और दुकानदारों द्वारा मारपीट का आरोप
राजस्थान के कासरगोड के सुधिन के और कोझिकोड के अश्वंथ आईटी, जो जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज में राजनीति विज्ञान के छात्र हैं, ने बताया कि एक दुकानदार ने उन पर जबरन सामान खरीदने का आरोप लगाया और कुछ देर बाद लोगों को बुलाकर उन्हें घेर लिया। मदद मांगने पर पुलिस अधिकारी भी उन्हीं पर टूट पड़े और उन्हें सड़क पर घुटने टेकने पर मजबूर किया।
भाषा न आने पर बढ़ा उत्पीड़न
छात्रों का आरोप है कि पुलिस और दुकानदार बार-बार उनसे हिंदी में बोलने की मांग कर रहे थे। जब वे धाराप्रवाह नहीं बोल पाए, तो उन्हें मारा गया, फोन छीन लिए गए और पुलिस बूथ में उनकी lungi तक उतरवा दी गई। कॉलेज के सीनियर छात्रों के पहुंचने पर ही रात 9 बजे उन्हें छोड़ा गया।
देश में भाषा को लेकर ऐसे विवाद पहले भी सामने आए हैं। कर्नाटक में हिंदी बनाम कन्नड़, तमिलनाडु में हिंदी थोपने के आरोप, महाराष्ट्र में मराठी–गैर मराठी विवाद और उत्तर-पूर्वी राज्यों में नस्लीय भेदभाव जैसे मुद्दे लंबे समय से तनाव पैदा करते रहे हैं। भाषा लोगों की पहचान, संस्कृति और गर्व का हिस्सा होती है, इसलिए किसी भी भाषा को थोपे जाने की भावना विवाद को जन्म देती है।
शिकायत दर्ज, जांच और कानूनी कार्रवाई जारी
हमले के बाद छात्रों ने डीसीपी ऑफिस में शिकायत दी, जिसके बाद एक पुलिस अधिकारी और कुछ दुकानदारों के खिलाफ FIR दर्ज की गई। आंतरिक विभागीय जांच भी शुरू हो चुकी है। इस मामले में केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन और सांसद जॉन ब्रिटास ने हस्तक्षेप कर न्याय की मांग की है। छात्रों का कहना है कि समझौते के प्रयास हुए, लेकिन वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

















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