सुप्रीम कोर्ट ने तीन हिस्सों में सुनाया फैसला
आवारा पशुओं के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की संयुक्त बेंच ने आदेश को तीन हिस्सों में बांटते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए। कोर्ट ने पहले हिस्से में सभी राज्यों से रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह बताया जाएगा कि अब तक कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। दूसरे हिस्से में हाईवे से जानवरों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि तीसरे हिस्से में सभी सरकारी संस्थानों की फेंसिंग अनिवार्य करने का आदेश दिया गया है।
राज्यों को हलफनामा देने का निर्देश
जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि आदेश का पहला हिस्सा कंप्लायंस यानी पालन से जुड़ा है। कोर्ट ने अमिकस क्यूरी की रिपोर्ट को अपने आदेश का हिस्सा मानते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करें। इसमें यह बताया जाए कि रिपोर्ट में जिन कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया है, उन्हें दूर करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर किसी राज्य ने ढिलाई दिखाई या लापरवाही की, तो उसे बेहद गंभीरता से लिया जाएगा।
मुख्य सचिवों को सौंपी गई जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ तो जिम्मेदार अफसरों पर व्यक्तिगत कार्रवाई की जाएगी। सभी राज्यों को 8 हफ्तों के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी, जिसमें बताया जाए कि इन निर्देशों को लागू करने के लिए क्या सिस्टम तैयार किया गया है।
संस्थानों की सुरक्षा और कुत्तों के हमलों पर चिंता
जस्टिस मेहता ने कहा कि फैसले का तीसरा हिस्सा संस्थानों की सुरक्षा से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि हाल के दिनों में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ी हैं, इसलिए सभी सरकारी और शैक्षणिक संस्थानों की सीमाओं पर फेंसिंग जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यह कदम न केवल मानव सुरक्षा बल्कि पशु नियंत्रण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी आवश्यक है। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकारें इस दिशा में गंभीरता से काम करेंगी।













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