सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत पर लगाई रोक
उन्नाव रेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को एक बार फिर बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को मिली ज़मानत पर रोक लगा दी है और उसकी उम्रकैद की सज़ा को फिलहाल बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि अपराध गंभीर और पीड़िता नाबालिग थी।
हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल
दरअसल, 23 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सेंगर की सज़ा पर रोक लगा दी थी कि विधायक को “लोक सेवक” नहीं माना जा सकता। इस तर्क पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा ऐतराज जताया। अदालत ने कहा कि अगर ऐसा माना गया, तो कानून की भावना ही खत्म हो जाएगी, क्योंकि सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों को विशेष ज़िम्मेदारी के दायरे में रखा जाता है।
अपराध, सत्ता और सज़ा का सवाल
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब अपराध हुआ, तब पीड़िता 16 साल से कम उम्र की थी और आरोपी सत्ता के पद पर था। ऐसे में कड़ी सज़ा पूरी तरह जायज़ है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि सेंगर पहले से ही पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।
न्याय की लंबी लड़ाई अब भी जारी
पीड़िता वर्षों से इंसाफ़ के लिए संघर्ष कर रही है। ज़मानत के फैसले के बाद उसे दोबारा विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद पीड़िता का कहना है कि उसकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और वह अंत तक न्याय के लिए खड़ी रहेगी।













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