रामनवमी पर सत्ता परिवर्तन का ऐतिहासिक क्षण
नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। 35 वर्षीय बालेंद्र शाह ने रामनवमी के पावन अवसर पर देश के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया। रामचंद्र पौडेल ने उन्हें संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत शीतल निवास में आयोजित भव्य समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। पारंपरिक शंखनाद और हिंदू रीति-रिवाजों के बीच हुआ यह आयोजन आध्यात्मिक और राजनीतिक ऊर्जा का अनोखा संगम बना।
युवाओं का नायक बना जनादेश का चेहरा
बालेंद्र शाह की पार्टी ने हालिया चुनावों में 275 में से 182 सीटें जीतकर अभूतपूर्व जीत दर्ज की। यह सिर्फ एक राजनीतिक विजय नहीं, बल्कि युवाओं की उम्मीदों का विस्फोट था। Gen-Z और युवा वर्ग ने उन्हें बदलाव के प्रतीक के रूप में अपनाया। खास बात यह रही कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को उनके मजबूत गढ़ झापा-5 में हराकर अपनी लोकप्रियता का लोहा मनवाया।
भावनात्मक पल: परिवार के साथ नई शुरुआत
शपथ ग्रहण समारोह में एक भावुक दृश्य ने सबका दिल जीत लिया—जब बालेंद्र शाह ने अपनी बेटी को गोद में उठाया। उनकी पत्नी सबीना भी इस खास मौके पर उनके साथ मंच पर मौजूद रहीं। यह दृश्य सिर्फ एक राजनीतिक नेता का नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार पिता और परिवार के व्यक्ति का भी प्रतीक बन गया।
इंजीनियर से प्रधानमंत्री तक का सफर
27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में जन्मे बालेंद्र शाह का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने Visvesvaraya Technological University से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। तकनीकी पृष्ठभूमि ने उन्हें शहरी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर की गहरी समझ दी, जिसका असर उनके मेयर कार्यकाल में भी दिखा। अब देश की बागडोर संभालते हुए उनसे उम्मीद है कि वे नेपाल को विकास और नवाचार की नई दिशा देंगे।














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