16 साल से लंबित केस पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 दिसंबर, 2025) को एक एसिड अटैक सर्वाइवर की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायिक देरी पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि 16 वर्षों से मामला लंबित होना राष्ट्रीय स्तर पर शर्मनाक है। अदालत ने सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि चार हफ्तों के भीतर एसिड अटैक से जुड़े लंबित मामलों का पूरा ब्योरा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किया जाए।
शाहीन मलिक के मामले में देरी को बताया ‘राष्ट्रीय शर्म’
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक की याचिका पर केंद्र और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को नोटिस जारी किए। शाहीन मलिक ने बताया कि 2009 में पानीपत (हरियाणा) में उन पर तेजाब डाला गया था और 2014 में केस रोहिणी कोर्ट ट्रांसफर होने के बावजूद अब तक फैसले तक नहीं पहुंचा। अदालत ने कहा कि यदि राजधानी में ऐसे मामलों का निपटारा नहीं हो पाता तो यह न्याय व्यवस्था का मजाक है।
पीड़ितों की दुश्वारियों पर अदालत ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान शाहीन मलिक ने एसिड अटैक पीड़ितों की गंभीर परिस्थितियों का उल्लेख किया—जैसे खाने-पीने में असमर्थता, आर्टिफिशियल ट्यूब पर निर्भरता और गंभीर अक्षमताओं के साथ जीवन जीने की मजबूरी। इस पर कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी जवाब मांगा कि क्यों एसिड अटैक सर्वाइवर्स को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए दिव्यांग व्यक्तियों की श्रेणी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
कानून संशोधन और विशेष अदालतों की आवश्यकता पर जोर
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाएगा और अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर विचार होगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने केंद्र को सुझाव दिया कि कानून में संशोधन या अध्यादेश लाकर एसिड अटैक पीड़ितों को आधिकारिक रूप से ‘दिव्यांग’ श्रेणी में शामिल किया जाए। साथ ही, उन्होंने कहा कि तेजाब हमले के मामलों की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों की स्थापना आदर्श होगी।














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