Advertisement

अब गरीबी का मजाक उड़ाना भी माना जाएगा भेदभाव, NCERT की 8वीं की नई किताब में बड़ा बदलाव

अब गरीबी का मजाक उड़ाना भी माना जाएगा भेदभाव, NCERT की 8वीं की नई किताब में बड़ा बदलाव

अब गरीबी का मजाक उड़ाना भी माना जाएगा भेदभाव, NCERT की 8वीं की नई किताब में बड़ा बदलाव

कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने एक अहम बदलाव किया है। अब छात्रों को यह पढ़ाया जाएगा कि भेदभाव की श्रेणी में किसी की आर्थिक स्थिति या गरीबी का मजाक उड़ाना भी आता है। यह बदलाव सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम का हिस्सा है और इसका उद्देश्य बच्चों में समानता, संवेदनशीलता और सम्मान की भावना को विकसित करना है।

भेदभाव की परिभाषा में आर्थिक स्थिति भी शामिल

भेदभाव की परिभाषा को NCERT की नई पुस्तक ‘Exploring Society: India and Beyond’ के “नागरिकता: अधिकार और कर्तव्य” अध्याय में पहले से अधिक व्यापक बनाया गया है। अब इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि किसी भी व्यक्ति के साथ उसकी जाति, धर्म, नस्ल, जातीय पहचान, दिव्यांगता, शारीरिक बनावट, लिंग, यौन पहचान या आर्थिक स्थिति के आधार पर अलग या गलत व्यवहार करना भेदभाव माना जाएगा। इस बदलाव के जरिए छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान और अवसर मिलना चाहिए, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।

गरीबी का मजाक उड़ाना सिर्फ गलत नहीं, कानून के खिलाफ भी

नई किताब में साफ़ तौर पर बताया गया है कि किसी भी गरीब या आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति का मजाक उड़ाना केवल नैतिक रूप से गलत नहीं है, बल्कि यह कानून की भावना के भी खिलाफ है। पुस्तक में उदाहरणों के माध्यम से बताया गया है कि कई बार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को स्कूल और समाज में अलग नजर से देखा जाता है या उनका मजाक बनाया जाता है। ऐसे व्यवहार से बच्चों के आत्मविश्वास और मानसिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसलिए आर्थिक आधार पर होने वाले भेदभाव को भी गंभीरता से समझाने की पहल की गई है।

बच्चों में समानता और संवेदनशीलता की सोच विकसित करने की कोशिश

NCERT का मानना है कि स्कूल केवल पढ़ाई का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों को सीखने का भी केंद्र है। विद्यार्थियों को नई किताब के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि आर्थिक स्थिति से किसी भी व्यक्ति की पहचान नहीं होती और हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है की सभी के साथ सम्मानजनक व्यव्हार करे।
इस बदलाव का उद्देश्य बचपन से ही छात्रों में समानता, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना है।

UGC नियमों के बाद इस बदलाव की चर्चा क्यों बढ़ी?

हाल ही में जारी UGC (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 में भेदभाव के कई आधारों का उल्लेख किया गया था, जिनमें धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्मस्थान और दिव्यांगता शामिल हैं। हालांकि इन नियमों में आर्थिक स्थिति का अलग से जिक्र नहीं किया गया था। इसी मुद्दे पर कई शिक्षा प्रणाली और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव को भी स्पष्ट रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए। ऐसे में NCERT की नई किताब में आर्थिक स्थिति को भेदभाव का आधार शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इससे पहले कक्षा 9 की किताबों में भी हुए थे बदलाव

महत्वपूर्ण यह है कि इससे पहले NCERT ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताबों में भी नए विषय जोड़े थे। इनमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और भारत के चुनाव आयोग से जुड़ी जानकारी शामिल की गई थी। नई सामग्री में छात्रों को भारत की चुनावी प्रक्रिया, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की व्यवस्था, मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में चुनाव आयोग की भूमिका के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाएगा।

शिक्षा के जरिए सामाजिक बदलाव की पहल

NCERT के इन नए बदलावों को शिक्षा के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चों को शुरुआती उम्र से ही समानता, सम्मान और भेदभाव के खिलाफ सही शिक्षा दी जाए, तो भविष्य में वे अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। नई किताब का यही संदेश है कि किसी व्यक्ति का मूल्य उसकी आर्थिक स्थिति से नहीं, बल्कि उसके व्यक्तित्व और अधिकारों से तय होता है।

read more https://gbn24.com/om-birla-takes-a-major-step-becoming-active-ahead-of-the-monsoon-session-a-significant-decision-regarding-rebel-mps-from-the-tmc-and-shiv-sena-ubt-could-be-announced-soon/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *