ओम बिरला का बड़ा फैसला लोकसभा अध्यक्ष के सामने लंबित है दल-बदल कानून से जुड़े मामले मानसून सत्र शुरू होने से पहले हो सकता है निपटारा
ओम बिरला का बड़ा फैसला संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला महत्वपूर्ण राजनीतिक मामलों के निपटारे की दिशा में सक्रिय हो गए हैं जानकारी के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस (TMC)और शिवसेना (UBT) की बागी सांसदों से जुड़े मामले पर जल्द ही अंतिम फैसला लिया जा सकता है। इन मामलों पर लंबे समय से राजनीतिक दलों और सांसदों की नजरे बनी हुई है ऐसे में स्पीकर का निर्णय राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
दरअसल दोनों दलों ने अपने-अपने बागी सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोध कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है वही संबंधित सांसदों ने भी अपने पक्ष में दलीलें पेश की है। अब अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष को करना है जिसके लिए कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा की जा रही है।
मानसून सत्र से पहले ही क्यों बड़ी हलचल?
संसद का मानसून सत्र जल्द शुरू होने वाला है ऐसे में लोकसभा सचिवालय लंबित मामलों को निपटने की प्रक्रिया में जुड़ा हुआ है। माना जा रहा है कि सत्र शुरू होने से पहले यदि इन मामलों पर फैसला आ जाता है तो सदन की कार्रवाई और राजनीतिक समीकरणों में स्पष्टता आ सकती है।
इसके अलावा अगर बात की जाए बागी सांसदों की स्थिति स्पष्ट होने के बाद लोकसभा में उनकी मान्यता बैठने की व्यवस्था और संसदीय भूमिका से जुड़े कई सवालों पर भी समाधान हो जाएगा। यही कारण है कि राजनीतिक गलियारों में इस फैसले पर लेकर चर्चा तेज हो गई है
TMC के बागी सांसदों पर क्या है विवाद?
तृणमूल कांग्रेस के कुछ सांसद ने अपनी पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया था जिसके बाद पार्टी नेतृत्व में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की टीएमसी का आरोप है कि इन सांसदों ने पार्टी के विचारधारा और अनुशासन का उल्लंघन किया है तो वहीं दूसरी ओर संबंधित सांसदों का दावा है कि उन्होंने किसी संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया। ऐसे में देखा जाए तो दोनों पक्षों के तर्कों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा अध्यक्ष को निर्णय लेना है यही कारण है कि इस मामले को काफी संवेदनशील भी माना जा रहा है।

शिवसेना (UBT) की बागी सांसदों का मामला भी चर्चा में
टीएमसी के अलावा शिवसेना की बागी सांसदों का मामला भी लंबे समय से फैसले के इंतजार में है। उद्धव ठाकरे गुट का आरोप है कि कुछ सांसद ने पार्टी छोड़ कर दूसरे गट का समर्थन किया जिससे दल बदल कानून का उल्लंघन हुआ है।
हालांकि बागी सांसदों का पक्ष उससे अलग हैं उनका कहना है कि उन्होंने संवैधानिक और कानूनी दायरे में रहकर निर्णय लिया ऐसे में स्पीकर के फैसले का इंतजार दोनों पक्षों को है।
दल-बदल कानून के तहत होगा निर्णय
इन मामला का फैसला संविधान की दसवीं अनुसूची जिसे आमतौर पर दल-बदल विरोधी कानून भी कहा जाता है इसके तहत किया जाएगा। इस कानून का उद्देश्य निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए बार-बार दल बदलने की प्रवृत्ति को रोकना है।
लोकसभा अध्यक्ष जांच करेंगे कि सम्बंधित सांसदों ने कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया है या नहीं यदि उल्लंघन साबित होता है उनके सदस्यता पर असर पड़ सकता है वहीं यदि उनके पक्ष में निर्णय आता है तो वह अपनी संसदीय स्थिति बरकरार रखेंगे।
सभी राजनीतिक दलों की नजर फैसले पर
टीएमसी और शिवसेना दोनों ही इस फैसले को बेहद अहम मान रहे है। एक और दोनों दल अपने बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद कर रहा है। तो वहीं दूसरी ओर इससे संबंधित सांसद भी अपने पक्ष में निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले का असर केवल संसद तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि राज्य की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में इसके राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकेंगे।
संसद की रणनीति पर पड़ सकता है असर
यदि मानसून सत्र से पहले फैसला आ जाता है तो विभिन्न दल अपनी है संसदीय रणनीति में बदलाव कर सकते हैं इसके साथ ही सदन में संख्या बल और विपक्षी राजनीति के समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है। वहीं लोकसभा अध्यक्ष का निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए बयान महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाएगा।
कुल मिलाकर देखा जाए तो मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा टीएमसी और शिवसेना (UBT) की बागी सांसद से जुड़े मामलों पर लिया जाने वाला फैसला राष्ट्रीय राजनीति का एक बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है एक ओर संबंधित दल अपने पक्ष में निर्णय की उम्मीद कर रहे हैं तो दूसरी ओर बाकी सांसद भी राहत की आस लिए हुए हैं अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि स्पीकर संवैधानिक प्रावधानों और दल बदल विरोधी कानून के तहत क्या अंतिम निर्णय सुनाते हैं।














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