Advertisement

दिल्ली की हवा बनी जानलेवा: डॉक्टरों की चेतावनी और जनता की बढ़ती नाराज़गी

Severe air pollution in Delhi with smog covering the city, people wearing masks

भारत की राजधानी में हवा रहने लायक नहीं बची

India भले ही आज दुनिया की 4th largest economy बन चुका है, लेकिन राजधानी Delhi की हवा लगातार ज़हरीली होती जा रही है। रविवार सुबह 7 बजे दिल्ली का Air Quality Index (AQI) 380 दर्ज किया गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। शहर के 38 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 14 अब “गंभीर श्रेणी” में पहुँच चुके हैं। सबसे बुरी हालत वज़ीरपुर में रही जहाँ AQI 448 तक पहुँचा, जबकि सबसे कम प्रदूषण मंदिर मार्ग पर रिकॉर्ड हुआ—AQI 300, जो फिर भी “बहुत खराब” श्रेणी में है।

डॉक्टरों की चेतावनी: ‘दिल्ली छोड़ दें’

दिल्ली की हवा कितनी खतरनाक हो चुकी है, इसका अंदाज़ डॉक्टर खुद दे रहे हैं। देश के जाने-माने फेफड़ों के विशेषज्ञ डॉ. गोपी चंद खिलनानी ने सलाह दी है कि जिन लोगों को पुरानी फेफड़ों की बीमारी या हृदय रोग है, उन्हें 6–8 हफ़्तों के लिए Delhi छोड़ देना चाहिए। उन्होंने साफ लिखा—
“दिल्ली छोड़ दें… अगर कर्ज़ लेकर भी जाना पड़े, तो जाएं।”

प्रदूषण का स्तर: पूरी सूची स्क्रीन पर देखें

CPCB ने दिल्ली के कई इलाकों को ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया है। AQI के ये आंकड़े इतने खराब हैं कि हवा अब सिर्फ दूषित नहीं, बल्कि जैविक रूप से ज़हरीली हो चुकी है।
इन इलाकों की पूरी सूची आप अभी स्क्रीन पर देख सकते हैं।

लोग महसूस कर रहे हैं हवा का दर्द

लंदन में रहने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल कुनाल कुशवाहा ने दिल्ली पहुँचने के बाद लिखा कि वे हवा में मौजूद प्रदूषण को “स्वाद की तरह महसूस” कर पा रहे थे। उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे फेफड़ों में सुइयाँ चुभ रही हों। प्रदूषण के खिलाफ इंडिया गेट पर लोगों ने तत्काल सरकारी कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह विरोध दर्शाता है कि दिल्ली की जहरीली हवा को लेकर लोगों की नाराज़गी लगातार बढ़ रही है।

यह सिर्फ चिंता नहीं—एक स्वास्थ्य आपातकाल है

दिल्ली की हवा हर दिन और ज़्यादा जहरीली होती जा रही है और लोग इसके असर को अपने शरीर पर महसूस कर रहे हैं। जब हवा COVID-19 से अधिक लोगों की जान ले रही है और डॉक्टर शहर छोड़ने की सलाह दे रहे हैं—तो इसे “सामान्य” कैसे माना जा सकता है? अब सवाल सिर्फ चिंता का नहीं, बल्कि ज़िंदगी का है।
आखिर कब तक दिल्ली की जनता इस ज़हरीली हवा में जीने को मजबूर रहेगी?
और कब माना जाएगा कि यह सिर्फ प्रदूषण नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य आपातकाल है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *