भारतीय महिला का गंभीर आरोप
अरुणाचल प्रदेश में जन्मी भारतीय नागरिक पेमाज़ वांगजॉम थोंगडोक ने आरोप लगाया है कि शंघाई पुडोंग एयरपोर्ट पर चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लेकर अपमानित किया। उनका कहना है कि अधिकारियों ने उनके भारतीय पासपोर्ट को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि “अरुणाचल प्रदेश चीन का हिस्सा है।”
हिरासत में रखा, भोजन और सुविधाएँ नहीं दीं
थोंगडोक के अनुसार, ट्रांजिट के दौरान उन्हें घंटों तक रोके रखा गया। इस दौरान उन्हें खाना, पानी या किसी भी बुनियादी सुविधा तक नहीं दी गई। अधिकारियों ने उन्हें बार-बार ताना मारा और उनके दस्तावेज़ों पर सवाल उठाते रहे।
फ्लाइट में चढ़ने से रोका, पासपोर्ट भी रोका गया
महिला ने बताया कि चीनी अधिकारियों ने उनकी कनेक्टिंग फ्लाइट में चढ़ने की अनुमति नहीं दी, जिसके चलते उनका पासपोर्ट एयरलाइन के पास चला गया। पासपोर्ट वापस पाने के लिए उन्हें अपना पैसा खर्च कर नया टिकट खरीदना पड़ा, जिससे आर्थिक नुकसान भी हुआ।
PM मोदी और भारतीय अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
थोंगडोक ने इस घटना को भारत की संप्रभुता पर हमला बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय अधिकारियों से तत्काल दखल देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चीन का यह व्यवहार न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि भारत के नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान पर सीधा सवाल उठाता है।
भारत ने चीन को जारी की कड़ी आपत्ति
सूत्रों के मुताबिक, भारत ने चीन के सामने औपचारिक रूप से कड़ा विरोध (demarche) दर्ज कराया है। भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप के बाद उन्हें देर रात ट्रांज़िट ज़ोन से बाहर निकलने की अनुमति मिली और वे अपनी आगे की यात्रा जारी कर सकीं। भारत ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ दोनों देशों के संबंध सामान्य करने के प्रयासों को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।













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