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VIT यूनिवर्सिटी, सीहोर में पीलिया फैलने के बाद छात्रों का हंगामा, कैंपस पांच दिनों के लिए बंद

Students protesting at VIT University Sehore over jaundice outbreak and poor hygiene

पीलिया के मामलों के बीच छात्रों का प्रदर्शन तेज

मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित VIT यूनिवर्सिटी में उस समय हड़कंप मच गया जब कई छात्रों में पीलिया की पुष्टि हुई। कैंपस में कथित रूप से गंदे पानी और खराब भोजन को लेकर छात्रों में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद प्रदर्शन शुरू हो गए। यह विरोध प्रदर्शन सप्ताह की शुरुआत में शुरू हुआ था, लेकिन मंगलवार रात को अचानक हिंसक रूप ले लिया।

प्रशासन ने पांच दिन के लिए कैंपस किया बंद

स्थिति बिगड़ने पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तुरंत बड़ा कदम उठाते हुए कैंपस को पांच दिनों के लिए बंद करने की घोषणा कर दी। बुधवार दोपहर तक बड़ी संख्या में छात्र अपना सामान लेकर परिसर छोड़ते नजर आए। सुरक्षा के मद्देनज़र पैरामिलिट्री बलों को कैंपस के आसपास तैनात किया गया ताकि स्थिति और न बिगड़े।

बीमारी के आंकड़ों पर विवाद, छात्रों-प्रशासन में मतभेद

यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रार के.के. नायर ने किसी भी छात्र की मौत की अफवाहों को खारिज करते हुए बताया कि कुल 22 छात्रों में पीलिया के लक्षण मिले हैं और वे इलाज के लिए अपने घर लौट चुके हैं। वहीं छात्रों का दावा है कि वास्तविक संख्या कहीं अधिक है और करीब सौ छात्रों को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ी। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत उठाने पर गार्ड्स ने उन्हें धमकाया और मारपीट की।

पुलिस हस्तक्षेप से काबू हुई स्थिति, कई वाहन फूंके गए

मंगलवार रात से बुधवार तड़के 3 बजे के बीच स्थिति बेकाबू हो गई। एसडीओपी आकाश अमलकर के अनुसार, हिंसा बढ़ने पर आसपास के पांच थानों से पुलिस बल बुलाया गया। कई वाहनों में आग लगाने की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस ने घंटों की मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया।

स्वास्थ्य विभाग की जांच और प्रशासन का बयान

यूनिवर्सिटी की ओर से जारी बयान में बताया गया कि 23 से 25 नवंबर के बीच जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने कैंपस के भोजन, पानी, स्वच्छता और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया था तथा वे संतुष्ट दिखे। बुधवार सुबह एसडीएम नितिन तले और एसडीओपी अमलकर ने भी परिसर का दौरा किया। प्रशासन ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और 30 नवंबर 2025 तक छुट्टी की घोषणा की गई है। यूनिवर्सिटी ने स्वास्थ्य मानकों को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

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