मतदाता सूची में अनोखे नाम
आगर मालवा में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण इस बार चर्चा का विषय बना है। जिले के पारदी समुदाय में नामकरण की प्रक्रिया बेहद अनोखी है। टीवी पर जो दिखाई दे या आसपास जो सुना जाए, वही बच्चों का नाम बन जाता है। इसी वजह से मतदाता सूची में काजू, बादाम, सोल्जर, जंगलराज, परदेसी, धर्मेंद्र, हेमा मालिनी और एंटीना टीवी जैसे नाम दर्ज हैं।
पारदी समुदाय की परंपरा
पारदी समुदाय लगातार पलायन करता है और मजदूरी के दौरान एक गांव से दूसरे गांव जाता रहता है। यहां नाम केवल पहचान का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा हैं। बच्चों के नामकरण में कोई औपचारिक नियम नहीं, बल्कि सहज तरीके से चुने गए शब्दों का इस्तेमाल होता है। यही कारण है कि टीवी या आसपास सुनाई देने वाले शब्द बच्चे का नाम बन जाते हैं।
सत्यापन की चुनौती
बीएलओ (ब्लॉक लेवल अधिकारी) के लिए इन नामों का सत्यापन आसान नहीं है। कई परिवार स्थाई पते पर कम मिलते हैं, और कई गांवों में इंटरनेट उपलब्ध नहीं होता। ऐसे क्षेत्रों में बीएलओ पहले ऑफलाइन फॉर्म भरते हैं और बाद में ऑनलाइन अपडेट करते हैं। इस बार की SIR प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि नामों की अनोखी दुनिया के कारण भी सुर्खियों में रही।
फॉर्म डिजिटाइजेशन और प्रशासनिक तैयारी
जिले में अब तक 80 प्रतिशत से अधिक फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके हैं। प्रशासन इसे बड़ी उपलब्धि मान रहा है। कई इलाकों में स्पेशल कैंप लगाए गए, जैसे कोतवाली क्षेत्र में, जहाँ ट्रांसफर हुए पुलिसकर्मियों का सत्यापन किया गया। नेटवर्क समस्या वाले क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त ऑपरेटरों की तैनाती भी की गई है।
निष्कर्ष
आगर मालवा की मतदाता सूची सिर्फ संख्याओं और फॉर्म भरने तक सीमित नहीं है। यहां हर नाम एक दिलचस्प कहानी के रूप में दर्ज होता है। पारदी समुदाय की अनोखी परंपरा ने इस सूची को सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि हर मतदाता का नाम सही और अद्यतित रूप में सूची में दर्ज हो।













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