रुपये में ऐतिहासिक गिरावट जारी
27 नवंबर को भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपना अब तक का सबसे निचला स्तर छू लिया। आजादी के शुरुआती दशकों से शुरू हुई रुपये की गिरावट 1991 के बड़े अवमूल्यन के बाद और तेज होती गई।
वर्षों में रुपये का गिरता मूल्य
1990 के दशक की शुरुआत में 1 डॉलर की कीमत लगभग ₹22.74 थी।
1990 के दशक के मध्य तक यह बढ़कर ₹42.48 पहुंच गई।
2013 में यह और गिरकर ₹63.33 हो गई।
और अब, रुपये ने ₹89.41 प्रति डॉलर का ऐतिहासिक इंट्रा-डे लो छुआ है।
गिरावट के पीछे प्रमुख कारण
हालिया गिरावट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं—
• भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में संभावित देरी की चिंता
• विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा लगातार बिकवाली
• शुरुआती दौर में विदेशी मुद्रा बाज़ार में RBI की मजबूत दखल की कमी
इन कारकों ने मिलकर रुपये पर दबाव बढ़ाया और लगातार कमजोरी दर्ज की गई।
RBI की एंट्री से रुपये को राहत
तेज़ गिरावट के बाद रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने हस्तक्षेप किया और विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने की कोशिश की। इसके बाद रुपये में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली।
रुपया अब इंट्रा-डे हाई ₹89.08 तक पहुंच चुका है और पिछले दो सत्रों में ₹89.22–₹89.23 के स्तर पर बंद हुआ है।













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