छठ पूजा में Yamuna का अस्थायी साफ़-सुथरा रूप
छठ पूजा के दौरान दिल्ली सरकार की तारीफ हुई थी कि उन्होंने Yamuna को साफ़ कर दिया। लेकिन 30 दिन बाद जब नदी का हाल देखा गया, तो वहां जहर भरी झाग, तेज़ गंध और गंदगी थी। सिर्फ़ 30 दिनों में नदी का ये हाल हुआ, जो साफ़-सुथरा दिखने वाला दृश्य केवल अस्थायी था।
अस्थायी सफ़ाई प्रयास
छठ पूजा से पहले सरकार ने defoaming chemicals का छिड़काव किया और बोट्स की मदद से झाग हटाया ताकि नदी साफ़ दिखे। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन केमिकल कंटेनरों को कार्यक्रम के बाद छिपा दिया गया। नदी का असली हाल छुपाने के लिए ये प्रयास केवल अस्थायी थे।
प्रयासों का रुकना
पूजा समाप्त होने के बाद सरकार ने सफाई के कामों को कम कर दिया और केमिकल छिड़काव भी बंद कर दिया। बिना सतत प्रयास के नदी जल्दी ही अपने प्रदूषित स्वरूप में लौट गई।
प्रदूषण की वापसी
अस्थायी सफ़ाई के बंद होने के बाद, अप्रक्रियाजात सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट फिर से नदी में आने लगे। यही मुख्य कारण है कि झाग और तेज़ गंध फिर से दिखाई देने लगी।
झाग और गंध का कारण
झाग का कारण है उच्च स्तर के फॉस्फेट और surfactants, जो untreated waste के पानी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। वहीं तेज़ गंध अमोनिया के उच्च स्तर के कारण आती है, जो organic waste के टूटने से निकलती है। असली सफाई और प्रदूषण नियंत्रण के बिना, Yamuna की स्थिति केवल अस्थायी साफ़ दिखने तक सीमित रहती है।













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