मनरेगा की जगह नया मिशन
ग्रामीण भारत के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब लोकसभा ने विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी G RAM G बिल, 2025 को मंजूरी दे दी। यह विधेयक 20 साल पुराने मनरेगा की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि मनरेगा ने रोजगार सुरक्षा दी, लेकिन समय के साथ इसकी सीमाएं सामने आईं। G RAM G बिल का उद्देश्य अस्थायी रोजगार से आगे बढ़कर गांवों में टिकाऊ आजीविका और मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
125 दिन का गारंटीकृत रोजगार
नए कानून के तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का वेतन रोजगार मिलेगा, जो मनरेगा से 25 दिन अधिक है। खेती को प्राथमिकता देते हुए बुवाई और कटाई के पीक सीजन में 60 दिनों तक सरकारी काम रोकने का प्रावधान किया गया है। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक या अधिकतम 15 दिन के भीतर करना अनिवार्य होगा।
टिकाऊ काम और डिजिटल निगरानी
योजना के तहत पानी, सड़क, बाजार, भंडारण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल होंगे। हर संपत्ति का राष्ट्रीय डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा। पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग और GPS आधारित रियल-टाइम निगरानी लागू की जाएगी।
फंडिंग और जवाबदेही का नया मॉडल
अब योजना का खर्च केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे—60% केंद्र और 40% राज्य, जबकि पूर्वोत्तर में 90:10 का अनुपात होगा। सालाना करीब 1.51 लाख करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। निगरानी के लिए परिषदें बनेंगी और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी पंचायतों के पास ही रहेगी।













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