आम नागरिकों की निजता के लिए बड़ी जीत
हाल ही में आम भारतीय नागरिकों की निजता के लिए एक बड़ी जीत मिली है। सरकार ने संचार साथी साइबर सुरक्षा ऐप को सभी नए मोबाइल में प्री-इंस्टॉल करने का आदेश वापस ले लिया है। यह फैसला उस दिन आया जब सरकार ने कई मोबाइल निर्माता कंपनियों को ऐप प्री-इंस्टॉल करने का आदेश दिया था।
विपक्ष और जनता के दबाव के कारण नीति में बदलाव
पिछले 24 घंटों में विपक्ष और आम जनता ने इसे निजता का उल्लंघन और निगरानी के तौर पर देखा और लगातार विरोध किया। लोगों ने कहा कि इससे सरकार को उनकी फोटो, कॉल लॉग और डेटा तक पहुंच संभव हो सकती है। इस mounting pressure के बाद सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार करना पड़ा।
सरकार ने स्पष्ट किया: ऐप snooping के लिए नहीं है
सरकार ने कहा कि ऐप अब यूजर्स द्वारा अपनाया जा रहा है, इसलिए प्री-इंस्टॉलेशन अनिवार्य नहीं किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐप स्नूपिंग के लिए नहीं है और यह केवल नागरिकों की सुरक्षा के लिए है। साथ ही, यूजर्स अपनी इच्छा से ऐप को डिलीट भी कर सकते हैं।
पहले आदेश और मोबाइल कंपनियों की प्रतिक्रिया
पहले आदेश में कहा गया था कि सभी नए डिवाइस में ऐप पहले से इंस्टॉल होगा और मौजूदा डिवाइस को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए ऐप मिलना चाहिए। इसके अलावा, निर्माता ऐप की कार्यक्षमता को बदल या बंद नहीं कर सकते थे। हालांकि, कई मोबाइल कंपनियों, विशेषकर Apple ने कहा कि वह आदेश का पालन नहीं करेगी क्योंकि यह उनकी प्राइवेसी और सुरक्षा प्रणाली के खिलाफ है।
समय पर सुधार और जनता की सराहना
विपक्ष ने इसे नैतिक जीत बताया है, लेकिन जनता और विशेषज्ञों ने सरकार की इस प्रतिक्रिया की भी सराहना की। उन्होंने फीडबैक को ध्यान में रखते हुए नीति में सुधार किया और समय रहते आदेश वापस लिया। इससे यह साफ है कि नीति में लचीलापन और नागरिकों की निजता की सुरक्षा सरकार के लिए प्राथमिकता है।













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