मुख्य अतिथि और भारत-ईयू समिट
गणतंत्र दिवस 2026 पर भारत के मुख्य अतिथि होंगे यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेन और यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा। यह दौरा सिर्फ औपचारिक सेरेमनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देने का बड़ा मकसद है। दोनों पक्ष 27 जनवरी को होने वाले भारत-ईयू समिट में इस ऐतिहासिक डील पर मुहर लगाने की संभावना पर काम कर रहे हैं।
रणनीतिक और आर्थिक उद्देश्य
इस दौरे के दौरान दोनों पक्ष कार्बन टैक्स (CBAM), मार्केट एक्सेस और अन्य आर्थिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। भारत और EU का मकसद अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को नए स्तर पर ले जाना है। पीयूष गोयल और EU अधिकारी लगातार इस समझौते को अंतिम रूप देने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि दशकों से लंबित FTA को सफल बनाया जा सके।
भारत की कूटनीतिक रणनीति
ईयू के शीर्ष नेतृत्व को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित करना भारत की सोच-समझ कर लिया गया कूटनीतिक कदम है। यह कदम दुनिया को संदेश देता है कि भारत यूरोप के साथ अपने संबंधों को मजबूती से बढ़ाना चाहता है और दोनों पक्षों के बीच नई साझेदारी को बढ़ावा देना चाहता है।
खेतर और सहयोग
इस दौरे से ट्रेड, डिफेंस, टेक्नोलॉजी और People-to-People Exchange में सहयोग को बढ़ावा मिलने की संभावना है। EU के दो बड़े नेताओं की एक साथ भारत यात्रा एक ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है, जो दोनों पक्षों के बीच दीर्घकालीन और मजबूत रिश्तों की नींव रखेगी।













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