पुराने सत्ता केंद्र से नए युग की शुरुआत
13 फरवरी को प्रधानमंत्री Narendra Modi देश की प्रशासनिक धुरी को एक नए पते पर ले जा रहे हैं। दोपहर 1:30 बजे ‘सेवा तीर्थ’ नाम का अनावरण और शाम 6 बजे इसका औपचारिक उद्घाटन—इन दो क्षणों के साथ लगभग 9 दशकों से सत्ता का केंद्र रहे North Block और South Block इतिहास के अध्याय में दर्ज हो जाएंगे। ब्रिटिश काल की सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में शाम 4 बजे होने वाली बैठक आख़िरी आधिकारिक बैठक होगी—एक प्रतीकात्मक विराम, जो अतीत और भविष्य के बीच खींची जा रही नई रेखा को स्पष्ट करता है।
ब्रिटिश काल की भव्य इमारतों का इतिहास
1900 के शुरुआती दशक में ब्रिटिश आर्किटेक्ट Herbert Baker द्वारा डिजाइन की गई इन इमारतों की भव्यता—ऊँचे प्लिंथ, विशाल स्तंभ, गुंबद और लाल-बफ सैंडस्टोन—सिर्फ वास्तु नहीं, सत्ता का संदेश थीं। इंडो-सारासेनिक और क्लासिकल यूरोपीय शैली का मिश्रण औपनिवेशिक स्थायित्व का प्रतीक था। ऊँचाई और ठोसपन नागरिक और राज्य के बीच दूरी का अहसास कराते थे—मानो सत्ता ऊपर से संचालित होती हो। यह स्थापत्य कला के रूप में शासन की मानसिकता का प्रदर्शन था, जिसमें आम और खास के बीच एक अनकहा विभाजन झलकता था।
‘सेवा तीर्थ’ में एकीकृत प्रशासनिक व्यवस्था
‘सेवा तीर्थ’ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय को एक ही परिसर में समाहित किया गया है—जो पहले अलग-अलग इमारतों में बिखरे हुए थे। मंत्रालयों का यह बिखराव समन्वय की कमी, बढ़ती रखरखाव लागत और कार्यक्षमता में बाधा बनता था। अब ‘एक जगह-एक साथ-एक कैंपस’ की अवधारणा के तहत प्रशासनिक कामकाज को आधुनिक, सुव्यवस्थित और भविष्य-उन्मुख ढांचे में ढाला गया है। यह बदलाव केवल स्थान का नहीं, कार्यसंस्कृति का भी संकेत है।
डिजिटल और पर्यावरण-अनुकूल नया ढांचा
कर्तव्य भवन-1 और 2 डिजिटल तकनीकों से लैस कार्यालयों, केंद्रीकृत रिसेप्शन और जनता से सीधे संवाद के लिए विशेष सार्वजनिक क्षेत्रों के साथ तैयार किए गए हैं। 4-स्टार GRIHA मानकों के अनु रूप इन इमारतों में रिन्यूएबल एनर्जी, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा-कुशल निर्माण तकनीकों का इस्तेमाल हुआ है। स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी सुविधाएं इसे सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती हैं। यह ढांचा पर्यावरणीय जिम्मेदारी और प्रशासनिक गति—दोनों को साथ लेकर चलता है।
खुला कार्यालय, नई कार्यसंस्कृति
नया प्रधानमंत्री कार्यालय “ओपन फ्लोर” मॉडल पर आधारित है—अब बंद कमरों और ऊंची दीवारों की जगह खुले, आपस में जुड़े कार्यक्षेत्र हैं। प्राकृतिक रोशनी, लंबे सममित गलियारे और खुले स्पेस पारदर्शिता और दक्षता का संदेश देते हैं। प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और उच्चस्तरीय बैठक कक्ष अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी के अनुरूप तैयार किए गए हैं। आधुनिकता के साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत की झलक भी इस परिसर में दिखाई देती है—मानो स्थापत्य कह रहा हो कि यह सिर्फ इमारत का नहीं, शासन के नजरिए और कार्यसंस्कृति के परिवर्तन का समय है।















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