Advertisement

Yuvraj Singh Retirement Secret: संन्यास के 7 साल बाद युवराज सिंह का ऐसा खुलासा, जिसने क्रिकेट जगत को हिला दिया

YUVRAJ SINGH

जब क्रिकेट खुशी नहीं, बोझ बन गया

भारतीय क्रिकेट के सबसे जुझारू ऑलराउंडरों में से एक युवराज सिंह ने अपने संन्यास को लेकर अब वो सच्चाई बताई है, जो अब तक पर्दे के पीछे थी | युवराज ने साफ कहा कि उनके रिटायरमेंट की सबसे बड़ी वजह क्रिकेट से खत्म होती खुशी थी | मैदान पर उतरते वक्त वो उत्साह नहीं रहा, जो कभी उनकी पहचान हुआ करता था | उन्होंने खुद से सवाल करना शुरू कर दिया था—“जब खेल में मजा ही नहीं आ रहा, तो मैं इसे क्यों खेल रहा हूं?”

सम्मान और सपोर्ट की कमी ने तोड़ा हौसला

युवराज ने खुलासा किया कि उन्हें टीम और आसपास के माहौल से न तो पूरा समर्थन मिल रहा था और न ही वो सम्मान, जिसके वो हकदार थे | उनके मुताबिक, जब किसी खिलाड़ी को ये दोनों चीजें नहीं मिलतीं, तो खेलना सिर्फ एक मजबूरी बनकर रह जाता है | मानसिक और शारीरिक थकावट ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था, और यही वो दौर था जब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया |

वर्ल्ड कप 2019 और संन्यास का फैसला

2019 वर्ल्ड कप टीम में जगह न मिलना युवराज के लिए बड़ा झटका था | उसी साल जून में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट और आईपीएल दोनों से संन्यास का ऐलान कर दिया | 2011 वर्ल्ड कप के ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ रहे युवराज के लिए ये फैसला आसान नहीं था, लेकिन वो जानते थे कि अब खुद को और घसीटना सही नहीं है | उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्होंने खेल छोड़ा, उसी दिन उन्हें फिर से “खुद जैसा” महसूस हुआ |

युवराज सिंह का बड़ा खुलासा

सानिया मिर्ज़ा के यूट्यूब पॉडकास्ट ‘सर्विंग इट अप विद सानिया’ में बातचीत के दौरान युवराज सिंह ने अपने करियर के एक भावनात्मक पहलू पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा आया जब उन्हें क्रिकेट खेलने में मज़ा नहीं आ रहा था। युवराज ने कहा कि जब खेल से खुशी ही खत्म हो जाए, तो यह सवाल अपने-आप उठता है कि फिर क्रिकेट क्यों खेला जाए।

एक सच्चे मैच विनर की विरासत

युवराज सिंह सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं, बल्कि भारत के सबसे बड़े मैच विनर्स में से एक रहे हैं | 304 वनडे मैचों में 8701 रन, 14 शतक, 111 विकेट—ये आंकड़े खुद उनकी महानता बयान करते हैं | 2011 वर्ल्ड कप में उनका योगदान हमेशा इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा | भले ही उनका संन्यास दर्द से भरा रहा हो, लेकिन युवराज सिंह की विरासत सम्मान, जज्बे और जुझारूपन की मिसाल बनकर हमेशा जिंदा रहेगी |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *