एक मामूली जुकाम से मौत तक का सफर
जोधपुर के एक निजी अस्पताल में साध्वी व कथावाचक प्रेम बाईसा की अचानक मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है | परिजनों के अनुसार प्रेम बाईसा पूरी तरह स्वस्थ थीं, सिर्फ हल्का जुकाम और गले में खराश थी | 28 जनवरी को घर बुलाए गए कंपाउंडर ने शुरुआती जांच के बाद इंजेक्शन लगाया और महज 30 सेकंड में उनकी हालत बिगड़ने लगी | सांस लेने में तकलीफ, बेचैनी और कमजोरी इतनी तेजी से बढ़ी कि परिजन कुछ समझ पाते, उससे पहले ही उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया |
अंतिम शब्द और न्याय की गूंज
साध्वी के पिता वीरम नाथ बताते हैं कि उनकी बेटी ने अंतिम क्षणों में कहा था—“मुझे जीते जी न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद मुझे न्याय जरूर मिलना चाहिए” | ये शब्द आज पूरे मामले की आत्मा बन चुके हैं | परिवार का कहना है कि वे किसी पर सीधे आरोप नहीं लगाना चाहते, लेकिन यह जानना जरूरी है कि क्या इंजेक्शन से एलर्जिक रिएक्शन हुआ, क्या बिना जरूरी जांच दवा दी गई, या यह मेडिकल लापरवाही का मामला है |
गांव परेऊ में शोक
जब प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया | सैकड़ों अनुयायी, संत समाज और ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े | महिलाओं के भजन और पुरुषों की नम आंखों के बीच परिजनों ने परंपरा के अनुसार समाधि देने का फैसला किया | अनुयायियों का मानना है कि यह उनके त्याग, साधना और सेवा भाव के प्रति सम्मान है |
सोशल मीडिया विवाद ने बढ़ाया दर्द
मामले ने जब सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा, तो अफवाहों और आपत्तिजनक टिप्पणियों ने पीड़ा को और गहरा कर दिया | निजी रिश्तों और भगवे को लेकर की गई टिप्पणियों पर संत समाज में भारी आक्रोश है | महामंडलेश्वर ईश्वरी नंद गिरी ने कहा कि बिना तथ्य जाने साधु-संतों की छवि धूमिल करना शर्मनाक है और पुलिस को ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए |
पुराने विवाद की परछाईं
समर्थकों का आरोप है कि आश्रम से हाल ही में सीसीटीवी कैमरे हटाए गए, जिससे संदेह पैदा होता है | प्रेमराज चौधरी ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि कैमरे हटाने के कारणों की भी जांच होनी चाहिए | वहीं, पिछले साल जुलाई में वायरल हुए एक वीडियो और उससे जुड़े विवाद ने भी इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है | आज सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि सच्चाई, सम्मान और न्याय का है—जिसकी मांग अब एक स्वर में उठ रही है |















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